Jabalpur Water Crisis: जबलपुर। देश और प्रदेश की सरकारें ‘हर घर नल-जल योजना’ और ‘जल जीवन मिशन’ के माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर निवास करने वाले प्रत्येक नागरिक तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े विधिक व प्रशासनिक दावे कर रही हैं। परंतु, मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के ग्रामीण अंचल से आई एक तस्वीर इन तमाम दावों की जमीनी हकीकत को पूरी तरह बेपर्दा करती है। जबलपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खिरिया कला की आदिवासी बस्ती में पिछले दो महीनों से पेयजल की आपूर्ति पूर्ण रूप से ठप पड़ी हुई है। वर्तमान में चल रहे नौतपा के इस भीषण और प्रचंड गर्मी के दौर में आदिवासी मजदूर, गरीब और बीपीएल (BPL) श्रेणी के परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, जो स्थानीय प्रशासन की घोर विफलता और जन-समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता को स्पष्ट करता है।
चिलचिलाती धूप में रोजाना कई किलोमीटर का सफर; महिलाओं और बच्चों का दर्द
स्थानीय पीड़ितों से प्राप्त विधिक और व्यावहारिक जानकारी के अनुसार, खिरिया कला पंचायत के इस आदिवासी बाहुल्य अंचल में नल-जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा केवल कागजों और बंद पड़े नलों तक सीमित होकर रह गया है।
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जीवन का संकट: पानी जैसी मूलभूत और संवैधानिक जीवन आवश्यकता न मिलने के कारण स्थानीय गृहणियों, मासूम बच्चों और वयोवृद्ध बुजुर्गों को इस जानलेवा धूप व लू के बीच रोजाना कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है।
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फरियादियों की आपबीती: मामले में अपनी विधिक व्यथा बताते हुए फरियादी योगेश कॉल और सरोज गौड़ ने साझा किया कि पिछले साठ दिनों से वे लगातार अपनी समस्या स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत सचिव को बता रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मजदूरी छोड़कर दिन का एक बड़ा हिस्सा केवल पानी ढोने में ही बर्बाद हो जाता है।
आदिवासी उत्थान महासंघ का कड़ा रुख; कलेक्टर और मुख्य अभियंता को सौंपा मांगपत्र
आदिवासी समाज की इस दुर्दशा और प्रशासनिक अनदेखी को देखते हुए ‘आदिवासी उत्थान महासंघ (म.प्र.)’ ने अब इस मामले में कड़ा और विधिक रुख अख्तियार कर लिया है। महासंघ के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इस गंभीर जल संकट के त्वरित विधिक निवारण हेतु मुख्य अभियंता (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी – PHE) तथा जबलपुर जिला कलेक्टर को एक औपचारिक व कड़ा ज्ञापन सौंपा है।
महासंघ के पदाधिकारियों का मत: महासंघ के प्रबुद्ध पदाधिकारियों ने तीखे लहजे में कहा कि इस समस्या के विधिक निराकरण के संबंध में पूर्व में भी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को कई लिखित शिकायतें एवं स्मरण पत्र (Reminders) सौंपे जा चुके हैं। परंतु, सरकारी बाबुओं, गैर-जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों की आपसी सांठगांठ तथा उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है।
लोकतांत्रिक आंदोलन और माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) की चेतावनी
महासंघ ने सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन और पीएचई विभाग को अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि खिरिया कला की आदिवासी बस्ती में आगामी कुछ दिनों के भीतर नियमित और शुद्ध पेयजल आपूर्ति विधिक रूप से बहाल नहीं की गई, तो समाज चुप नहीं बैठेगा।
इसके निवारण न होने पर महासंघ न केवल जिला मुख्यालय पर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन, चक्काजाम और उग्र धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा, बल्कि इस गंभीर मानवीय लापरवाही और बुनियादी अधिकारों के हनन को लेकर माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ) में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर करेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय राजस्व अमले की ओर से तहसीलदार राजाराम कोल ने आश्वस्त किया है कि वे स्वयं पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के विधिक समन्वय से तकनीकी खामियों की जांच करवा रहे हैं ताकि ठेकेदार की जवाबदेही तय कर ग्रामीणों को अविलंब राहत पहुंचाई जा सके।









