VIP Treatment for Criminals: जबलपुर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिला अंतर्गत शहपुरा थाना क्षेत्र में अपराधियों और पुलिसकर्मियों के बीच कथित सांठगांठ तथा नियमों को ताक पर रखकर अपराधियों को ‘वीआईपी सुविधाएं’ मुहैया कराने का एक बेहद संगीन मामला प्रकाश में आया है। शहपुरा पुलिस द्वारा शराब तस्करी के एक बड़े आरोपी को विधिक सरकारी वाहन या कैदी वाहन के बजाय एक चमचमाती प्राइवेट कार में अत्यंत ठाठ-बाट के साथ कोर्ट ले जाने का सनसनीखेज वाकया उजागर हुआ है। पाटन कोर्ट परिसर से आरोपी का यह कार काफिला निकलने और उसके साथियों द्वारा अपनी धौंस चमकाने के लिए बनाए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समूचे मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की विधिक गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल दो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक जांच शुरू कर दी गई है।
रसूखदारों से कनेक्शन: सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाकर पाटन कोर्ट का सफर
दस्तावेजी और वायरल वीडियो साक्ष्यों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहपुरा पुलिस ने पिछले दिनों अवैध शराब तस्करी के संगीन मामले में आरोपी आकाश पटेल को गिरफ्तार किया था। न्यायिक प्रक्रियाओं के विधिक नियमानुसार, किसी भी श्रेणी के आरोपी को न्यायालय में पेश करते समय पूर्ण सुरक्षा मानकों के साथ शासकीय पुलिस वाहन या सुरक्षित लोक माध्यम से ही ले जाया जाना अनिवार्य होता है।
परंतु, आरोपी आकाश पटेल के राजनैतिक-प्रशासनिक रसूख और रसूखदारों से गहरे कनेक्शन के चलते ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने विधिक आचार संहिता को पूरी तरह मटियामेट कर दिया। ड्यूटी पर तैनात अमला आरोपी को सीधे एक निजी लग्जरी कार में बैठाकर पाटन कोर्ट के लिए रवाना हुआ। विस्मय की बात यह है कि इस प्राइवेट कार में न केवल सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी सवार थे, बल्कि आरोपी के अन्य साथी भी किसी वीआईपी (VIP) के सुरक्षागार्डों की तरह बेखौफ बैठे हुए थे।
रसूख प्रदर्शन की भूख पड़ी भारी; खुद के ही वीडियो जाल में फंसे रसूखदार
यह शर्मनाक घटनाक्रम तब पूरी तरह बेपर्दा हो गया जब आरोपी का यह ‘प्राइवेट कार काफिला’ पाटन कोर्ट परिसर से बाहर निकला। कानूनी शिकंजे में होने के बावजूद आरोपी और उसके साथियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने समाज और कानून व्यवस्था में अपना दबदबा दिखाने के चक्कर में इस पूरे घटनाक्रम का बकायदा एक रील/वीडियो शूट कर लिया।
इस वीडियो को रसूख के प्रदर्शन के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल किया गया, वैसे ही जबलपुर पुलिस की कार्यप्रणाली, निष्पक्षता और अपराधियों को जेल के बजाय मिलने वाली ‘शाही मेहमाननवाजी’ पर जनता द्वारा तीखे और गंभीर सवाल उठाए जाने लगे। वीडियो के संज्ञान में आते ही जबलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया गया है कि आरोपी आकाश पटेल को यह अवैध और नियम विरुद्ध वीआईपी सुविधा केवल और केवल उसके ऊंचे रसूख के प्रभाव में आकर दी गई थी।
हवलदार जयंत और सिपाही ताराचंद लाइन हाजिर; शुरू हुई कड़ी विभागीय जांच
इस प्रशासनिक और विधिक लापरवाही पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पाटन और शहपुरा अंचल के वरिष्ठ अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों पर कड़ी गाज गिराई है। प्रारंभिक जांच में:
-
हवलदार जयंत और
-
सिपाही ताराचंद की भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से संदिग्ध और पदीय दायित्वों के प्रति घोर अनुशासनहीनता का प्रतीक पाया गया है। दोनों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जवाब-तलब किया गया है और उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक जांच (Departmental Enquiry) संस्थित कर दी गई है।
जबलपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर तैर रहे वायरल वीडियो के एक-एक फ्रेम और तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस प्राइवेट कार का मालिकाना हक किसके पास है और क्या इसके पीछे कोई बड़ा लेन-देन शामिल था। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जांच पूरी होते ही दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को सेवा से निलंबित करने सहित अन्य विधिक एवं सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









