Jashpur Land Scam: कागजों पर ‘जातीय गिरगिट’: गोंड से उरांव बनकर नरेश सिदार ने किया करोड़ों का घोटाला; रायगढ़ HDFC बैंक में बंधक रखीं विवादित जमीनें

Jashpur Land Scam: गौरी शंकर गुप्ता/जशपुर/पत्थलगांव। छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के दावों के बीच मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव अंचल से एक ऐसा संगठित भू-घोटाला (लैंड स्कैम) सामने आया है, जिसने समूचे राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक स्वतंत्र पत्रकार की सजग विधिक शिकायत के बाद आदिवासियों की बेशकीमती जमीनों को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे हड़पने के इस सनसनीखेज मामले की गूंज अब सीधे देश के सर्वोच्च प्रशासनिक तंत्र यानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नई दिल्ली तक पहुंच चुकी है। पत्थलगांव तहसील कार्यालय से सरकारी फाइलों के गायब होने, बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के रातों-रात रिकॉर्ड विलोपित करने और वित्तीय लाभ के लिए अपनी जाति बदल लेने के इस संगठित सिंडिकेट के खुलासे के बाद जिला प्रशासन और भू-माफियाओं की नींद उड़ी हुई है।

‘जातीय गिरगिट’ का कारनामा: सरकारी रिकॉर्ड में गोंड से उरांव बना नरेश सिदार

खोजी पत्रकारिता और विधिक दस्तावेजों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे भू-घोटाले का मुख्य सूत्रधार नरेश कुमार सिदार (पिता अजब सिंह) नामक व्यक्ति है, जिसने शासकीय नियमों को ठेंगा दिखाते हुए एक ‘जातीय गिरगिट’ की तरह व्यवहार किया।

  • दस्तावेजी हेरफेर: शासकीय अभिलेखों के मुताबिक, नरेश कुमार सिदार ग्राम पालीडीह में ‘गोंड’ अनुसूचित जनजाति का सदस्य दर्ज है। परंतु, पत्थलगांव के प्राइम लोकेशन स्थित खसरा नंबर 513/85/ख की भूमि पर स्वामित्व का लाभ लेने के लिए वह अचानक कूट रचित ढंग से ‘उरांव’ जनजाति का बन जाता है।

  • अवैध डायवर्जन: नियमों को ताक पर रखकर इस सिंडिकेट ने अंचल की कृषि भूमियों (खसरा नंबर 513/15/क/5 और 513/24/क आदि) को धड़ल्ले से ‘वाणिज्यिक’ (Commercial) भूमि में परिवर्तित करा लिया ताकि वहां कंक्रीट का जंगल खड़ा किया जा सके।

  • बैंक मॉर्टगेज और करोड़ों का लेन-देन: 28 अगस्त 2025 का दिन इस सिंडिकेट के लिए वित्तीय महा-मुहूर्त साबित हुआ। एक ही दिन के भीतर इन विवादित व्यावसायिक जमीनों को एचडीएफसी बैंक (HDFC BANK) रायगढ़ शाखा में बंधक (Mortgage) रखकर करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और लोन की प्रक्रिया को अंजाम दे दिया गया।

सीक्रेट ऑडियो कॉल से खुला रायपुर कनेक्शन; आयुष अग्रवाल की सेटिंग उजागर

जशपुर की प्राइम लोकेशन (लुड़ेग रोड) पर चल रहे इस खेल के तार प्रादेशिक स्तर के भू-माफियाओं से जुड़े हैं। मामले में एक गोपनीय ऑडियो कॉल लीक होने के बाद पर्दे के पीछे के असली खिलाड़ी आयुष अग्रवाल का नाम सामने आया है। इस ऑडियो रिकॉर्डिंग से स्पष्ट हुआ है कि आयुष अग्रवाल रायपुर की बड़ी व्यावसायिक पार्टियों और रसूखदारों को जशपुर के लुड़ेग रोड पर 5 से 10 एकड़ आदिवासियों की प्राइम लैंड दिलाने की बिचौलिया कोआर्डिनेशन और अवैध सेटिंग कर रहा था।

‘मिस्टर इंडिया’ बनीं सरकारी फाइलें: बिना आदेश गायब हुआ स्व. सालिकराम का रिकॉर्ड

पत्थलगांव तहसील कार्यालय के भीतर फैले भ्रष्टाचार का सबसे वीभत्स रूप तब देखने को मिला, जब जमीनों का मालिकाना हक बिना किसी विधिक आदेश के बदल गया।

  • रिकॉर्ड विलोपन: मूल खातेदार स्व. सालिकराम की 2.015 हेक्टेयर (लगभग 5 एकड़) बेशकीमती जमीन का रिकॉर्ड बिना किसी सक्षम राजस्व अधिकारी (तहसीलदार/एसडीएम) के आदेश के रातों-रात सरकारी कंप्यूटरों और पंजियों से विलोपित (गायब) कर दिया गया।

  • पटवारी की रिपोर्ट: स्थानीय पटवारी की जांच रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि वर्ष 2011 तक यह भूमि विधिक रूप से सालिकराम के नाम पर दर्ज थी। परंतु, वर्ष 2013 के आते-आते बिना किसी वैधानिक दस्तावेज या बैनामा (Registry) के यह जमीन सुशीला कुजूर के नाम पर कैसे ट्रांसफर हो गई, इसका कोई भी रिकॉर्ड या फाइल तहसील कार्यालय में मौजूद ही नहीं है।

  • जबरन नामांतरण की तैयारी: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस सुशीला कुजूर की जमीन का मूल विधिक आधार ही गायब है, अब उसी विवादित भूमि को पत्थलगांव तहसीलदार द्वारा नरेश कुमार सिदार, किशन सिंह और विकास राठिया के नाम पर नामांतरित (Mutation) करने की त्वरित वैधानिक कार्यवाही की जा रही है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को प्रमाणित करता है।

पीएमओ (PMO) की सख्त एंट्री; आरटीआई (RTI) में लीपापोती की कोशिश

इस महा-घोटाले के विरुद्ध दिल्ली के शीर्ष स्तर पर 5 जनवरी 2026 को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसकी विधिक पंजीकरण संख्या PMOPG/D/2026/0007354 है और यह वर्तमान में केंद्रीय रडार पर ‘अंडर प्रोसेस’ है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे दबाने का पूरा प्रयास किया। जशपुर कलेक्ट्रेट ने 16 अप्रैल 2026 को एक आरटीआई (RTI) के जवाब में गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाते हुए कह दिया कि उनके पास इस गंभीर शिकायत की जांच से संबंधित कोई रिकॉर्ड ‘संधारित’ ही नहीं है।

पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद तहसीलदार की गोपनीय रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

मामला जब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने लगा और पुलिस विभाग की सक्रियता बढ़ी, तब जाकर 29 अप्रैल 2026 को तहसीलदार पत्थलगांव ने अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) को एक अत्यंत गोपनीय जांच रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के बाहर आते ही नरेश कुमार सिदार के साम्राज्य का भंडाफोड़ हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले नरेश कुमार सिदार और उसके परिवार के नाम पर ग्राम पालीडीह में 3.149 हेक्टेयर (खसरा नंबर 100, 163/1 आदि) और ग्राम पत्थलगांव के भीतर 10 अलग-अलग खसरों में 0.672 हेक्टेयर की संदेहास्पद अचल संपत्ति दर्ज पाई गई है।

‘खाकी-खादी’ के सिंडिकेट पर लटकी एफआईआर (FIR) की तलवार

आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और उनकी पैतृक संपत्तियों पर डाका डालने वाले इस ‘अजब-गजब’ गठजोड़ की फाइलें अब दिल्ली के सीधे नियंत्रण में हैं। स्थानीय पीड़ित जनता और जागरूक नागरिक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि भू-माफियाओं की चाकरी करने वाले राजस्व विभाग के दलाल और भ्रष्ट अधिकारी अब अपना बोरिया-बिस्तर बांध लें। इस लैंड स्कैम में शामिल सफेदपोश नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और ‘खाकी-खादी’ के इस नापाक सिंडिकेट के खिलाफ बहुत जल्द धोखाधड़ी, जालसाजी और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (Atrocities Act) के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजने की कड़ी कानूनी तलवार लटक रही है।

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