Bilaspur High Court : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसे पीड़ित परिवारों के लिए राहतभरा माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ किया है कि मुआवजे की गणना केवल पुराने नियमों या सीमित मानकों के आधार पर नहीं की जा सकती, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों और आय को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
Bilaspur High Court :अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि कई मामलों में ट्रिब्यूनल या निचली अदालतें कम मुआवजा तय कर देती हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को वास्तविक नुकसान की भरपाई नहीं मिल पाती। ऐसे में न्याय का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब मुआवजा वास्तविक आर्थिक क्षति के अनुरूप हो।
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Bilaspur High Court :फैसले के अनुसार, सड़क हादसों में मृतक या घायल व्यक्ति की वास्तविक आय, भविष्य की संभावनाएं और परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की “कैपिंग” या पुरानी सीमा के आधार पर मुआवजे को सीमित करना उचित नहीं है।
Bilaspur High Court :कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में कई लंबित और नए मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगा। इससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिक न्यायसंगत मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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Bilaspur High Court :इस निर्णय को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देशभर में सड़क हादसों के मामलों में मुआवजे को लेकर अक्सर विवाद सामने आते हैं। अब इस फैसले से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।









