Saturday, August 29, 2026
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Rahul Gandhi on Putin : ‘हम भी देश की आवाज़ हैं’—पुतिन से न मिलने देने पर राहुल गांधी का केंद्र पर जोरदार हमला

rahul putin
पुतिन यात्रा से पहले सियासी घमासान

नई दिल्ली : नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन से ठीक पहले राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि विदेशी प्रतिनिधियों और विपक्षी नेताओं के बीच परंपरागत मुलाकातों को रोकने की कोशिश की जा रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को अलग-थलग रखने की नीति अपना रही है।

राहुल गांधी का संगीन आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि वर्षों से यह परंपरा रही है कि भारत आने वाले विदेशी प्रतिनिधिमंडल विपक्ष के नेता से भी मुलाकात करते हैं। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह सरकार में यह सिलसिला लगातार चलता था।लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब वे विदेश यात्राओं पर जाते हैं तो वहां की सरकारों को भारत सरकार की तरफ से संदेश दिया जाता है कि वे विपक्ष के नेता से न मिलें।उन्होंने आरोप लगाया—“सरकार हमें देश का प्रतिनिधि ही नहीं मानती। पीएम मोदी इस प्रोटोकॉल को इसलिए नहीं मानते क्योंकि उनमें असुरक्षा की भावना है।”

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प्रियंका गांधी ने भी साधा निशाना
राहुल गांधी की ही तरह कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा—“विदेशी मेहमान आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष से अवश्य मिलते हैं लेकिन यह सरकार उल्टा कर रही है। यह सरकार किसी और की आवाज़ उठने ही नहीं देना चाहती।”

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को विदेशी संबंधों से दूर रख रही है, ताकि किसी भी तरह का अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने न आ सके।

शशि थरूर ने कहा—लोकतंत्र में दोनों पक्षों से मिलना चाहिए
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपरा रही है कि आने वाले प्रमुख नेता सरकार और विपक्ष—दोनों से मुलाकात करते हैं।थरूर ने कहा—“यह यात्रा महत्वपूर्ण है। भारत को रूस, अमेरिका और चीन—सभी के साथ संतुलित संबंध रखने की जरूरत है। ऐसे में केवल एक पक्ष की बातचीत पर्याप्त नहीं।”

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पुतिन दौरे से पहले विवाद तेज
व्लादिमीर पुतिन की यात्रा को लेकर जिस तरह से विपक्ष और सरकार के बीच तनाव बढ़ रहा है, उससे यह साफ है कि यह दौरा न सिर्फ कूटनीतिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम साबित होगा।

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