निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : देश और दुनिया में टाइगर कंजर्वेशन और जैव विविधता के लिए मशहूर कान्हा नेशनल पार्क से बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां पिछले 9 दिनों में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई है। एक ही परिवार के पांच बाघों की लगातार मौत से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शिकार की कमी और संक्रमण के कारण बाघिन और उसके शावक बेहद कमजोर हो गए थे।
सरही रेंज से शुरू हुआ मौत का सिलसिला
मामला कान्हा टाइगर रिजर्व के सरही परिक्षेत्र से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि 17 अप्रैल को पर्यटकों ने बाघिन ‘अमाही’ (T-141) और उसके शावकों को अत्यधिक कमजोर और बीमार हालत में देखा था।
इसके बाद वन विभाग ने सभी को रेस्क्यू कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती कराया, जहां वन्यजीव चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा था।
9 दिनों में खत्म हो गया पूरा कुनबा
बाघ परिवार की मौत का सिलसिला लगातार जारी रहा।
- 21 अप्रैल को पहले शावक की मौत हुई
- 24 अप्रैल को दूसरा शावक मृत मिला
- 25 अप्रैल को तीसरे शावक ने दम तोड़ दिया
- 29 अप्रैल को बाघिन अमाही और चौथे शावक की भी मौत हो गई
इस तरह महज 9 दिनों में एक पूरा बाघ परिवार खत्म हो गया।
भूख और संक्रमण बना मौत का कारण
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में फेफड़ों में संक्रमण मौत की बड़ी वजह सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक पर्याप्त शिकार नहीं मिलने के कारण बाघिन और उसके शावक कमजोर हो गए थे।कमजोर इम्यून सिस्टम के चलते वे संक्रमण की चपेट में आ गए और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
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फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए सैंपल
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाघिन और शावकों के सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ, जबलपुर की टीम भी जांच में जुटी हुई है।
कान्हा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि इलाज के दौरान बाघिन अमाही T-141 की मौत हुई है। प्रथम दृष्टया फेफड़ों में संक्रमण को कारण माना जा रहा है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
टाइगर कंजर्वेशन पर उठे बड़े सवाल
लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निगरानी और भोजन प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह स्थिति टाइगर कंजर्वेशन के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।











