बस्तर तेंदूपत्ता घोटाला: IFS अधिकारी अशोक पटेल गिरफ्तार

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रायपुर, 17 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ के बस्तर में सामने आए तेंदूपत्ता बोनस घोटाले में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) और एसीबी (भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आईएफएस अधिकारी अशोक पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। यह साय सरकार में पहली बार है जब किसी भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी की गिरफ्तारी हुई है। अशोक पटेल को गुरुवार को विशेष न्यायालय में पेश किया गया। बस्तर के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए जारी प्रोत्साहन राशि (करीब 7 करोड़ रुपए) के वितरण में हुई गड़बड़ियों की जांच के तहत यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने 2021-22 के सीजन में संग्राहकों को दी जाने वाली बोनस राशि को वितरित नहीं किया, बल्कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत उस राशि का गबन किया और कुछ हिस्से निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित कर दिया।

ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीमों ने सुकमा जिले में 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक खातों की जानकारी और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए। सबसे सनसनीखेज खुलासा उस वक्त हुआ जब डीएफओ कार्यालय सुकमा के कर्मचारी राजशेखर पुराणिक के घर से 26 लाख 63 हजार 700 रुपये नगद बरामद किए गए। यह बरामदगी स्पष्ट रूप से घोटाले की गंभीरता और इसकी व्यापकता को दर्शाती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मामले में पूर्व विधायक मनीष कुंजाम, डीएफओ कार्यालय के कर्मचारी राजशेखर पुराणिक, और प्राथमिक लघुवनोपज समिति के कई प्रबंधक जांच के दायरे में हैं। कुछ दिन पहले इन सभी के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए थे। आईएफएस अधिकारी अशोक पटेल के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) का भी मामला दर्ज किया गया है। इस संबंध में उनसे जुड़े स्थानों पर भी सर्च कार्रवाई की गई थी, जिसमें उनकी कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जानकारी जुटाई गई।

इस घोटाले ने राज्य की वन व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संग्राहकों को मिलने वाली सहायता राशि का इस तरह से दुरुपयोग होना न केवल जनकल्याण योजनाओं की विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि नीचे से ऊपर तक मिलीभगत इस गबन में शामिल रही है। ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है और जांच का दायरा और भी बढ़ाया जा सकता है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

बोनस घोटाले में यह गिरफ्तारी सरकार की “जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन” नीति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में और कितने बड़े नाम सामने आते हैं और प्रशासन किस हद तक दोषियों को सजा दिलाने में सफल होता है।

मुख्य बिंदु:

  • IFS अधिकारी अशोक पटेल गिरफ्तार

  • पहली बार किसी वन अधिकारी पर ईओडब्ल्यू/एसीबी की कार्रवाई

  • सुकमा में 12 जगहों पर छापेमारी

  • कर्मचारी के घर से 26 लाख रुपये नगद बरामद

  • घोटाले की राशि करीब 7 करोड़ रुपए

  • जांच अब भी जारी, कई और गिरफ्तारियां संभावित

साइबर फ्रॉड से जंग, जशपुर पुलिस ने तैयार किए 228 ‘साइबर योद्धा’

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जशपुर: डिजिटल युग में जहां हर व्यक्ति स्मार्टफोन और इंटरनेट से जुड़ा है, वहीं साइबर अपराध भी उतनी ही तेज़ी से पांव पसार रहे हैं। आए दिन आम लोग ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की पुलिस ने एक सराहनीय और अभिनव पहल करते हुए ‘साइबर योद्धा’ नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया है, जो साइबर अपराधों से निपटने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

जशपुर पुलिस ने यूनिसेफ, जिला प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर 228 साइबर योद्धाओं को तैयार किया है। दिल्ली से आए मास्टर ट्रेनर्स द्वारा इन युवाओं और जिले के 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर ठगी के तौर-तरीकों, तकनीकी हथकंडों और उनसे बचाव के तरीकों की गहन ट्रेनिंग दी गई। इस पहल में NSS से जुड़े छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। अब ये प्रशिक्षित योद्धा गांव-गांव जाकर लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचने के तरीके बताएंगे।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के पहले चरण में जिले की 40 पिछड़ी ग्राम पंचायतों को चिन्हित किया गया है। इन इलाकों में साइबर योद्धा स्थानीय लोगों से संवाद कर उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे। स्कूल, कॉलेज, बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर अभियान चलाकर साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरों और सतर्कता के उपायों को साझा किया जाएगा।

एसएसपी सिंह ने बताया कि यह पहल सिर्फ अपराधों पर नियंत्रण ही नहीं बल्कि ग्रामीण समुदाय को डिजिटल रूप से सशक्त और सजग बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। उन्होंने सभी साइबर योद्धाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया और उम्मीद जताई कि जशपुर से शुरू हुआ यह अभियान देशभर के लिए मिसाल बनेगा।

जशपुर पुलिस की यह पहल न केवल साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता लाने में अहम भूमिका निभाएगी, बल्कि यह एक मॉडल के रूप में अन्य जिलों द्वारा भी अपनाई जा सकती है।

भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज़, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर मंथन

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नई दिल्ली स्थित आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन और संगठनात्मक बदलावों को लेकर गहन मंथन हुआ। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक न सिर्फ पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व बल्कि राज्य इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर भी निर्णायक मानी जा रही है।

जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ता गया, अब नई नियुक्ति की तैयारी

भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं। पार्टी संविधान के अनुसार उनका कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका था। हालांकि, आगामी लोकसभा चुनावों और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनका कार्यकाल फिलहाल अनौपचारिक रूप से बढ़ा दिया गया था। अब जब लोकसभा चुनाव नज़दीक हैं और पार्टी को संगठनात्मक रूप से और अधिक मजबूत करने की ज़रूरत है, तो नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नए सिरे से कवायद शुरू कर दी गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नई नियुक्ति की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

जेपी नड्डा की शाह से मुलाकात के बाद मंथन और तेज

इससे पहले मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक विशेष मुलाकात की थी। इस बैठक को बेहद गोपनीय रखा गया, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति समेत संगठनात्मक नियुक्तियों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री आवास पर बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा अब नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए आठ नामों पर मंथन

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए फिलहाल जिन आठ नेताओं के नाम सबसे आगे हैं, उनमें शिवराज सिंह चौहान, सुनील बंसल, धर्मेन्द्र प्रधान, रघुवर दास, स्मृति ईरानी, वानति श्रीनिवासन, तमिलिसाई सौंदर्यराजन और डी. पुरंदेश्वरी प्रमुख हैं।

  • शिवराज सिंह चौहान: चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान न केवल संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को साधने में भी माहिर माने जाते हैं। लाडली बहना योजना जैसे सामाजिक अभियानों ने उन्हें एक जनप्रिय नेता के तौर पर स्थापित किया है। वे OBC वर्ग से आते हैं और RSS से भी उनका गहरा संबंध है।

  • सुनील बंसल: संगठनात्मक राजनीति के रणनीतिकार माने जाने वाले बंसल उत्तर प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्हें संघ का करीबी और जमीनी स्तर पर मजबूत नेता माना जाता है।

  • धर्मेन्द्र प्रधान: ओडिशा से आने वाले वर्तमान शिक्षा मंत्री न सिर्फ एक अनुभवी संगठनकर्ता हैं, बल्कि मोदी-शाह की कोर टीम के भी विश्वसनीय सदस्य माने जाते हैं। OBC समुदाय से होने के कारण वे भाजपा के सामाजिक आधार को और मजबूत कर सकते हैं।

  • रघुवर दास: झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री रहे दास ने राज्य में स्थिर शासन दिया और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ रही है। वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं।

  • स्मृति ईरानी: केंद्रीय मंत्री और पार्टी की जानी-मानी महिला चेहरा होने के साथ-साथ ईरानी का दक्षिण भारत में भी प्रभाव है। वे कई अहम मंत्रालयों का कुशल संचालन कर चुकी हैं।

  • वानति श्रीनिवासन: भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनका संगठनात्मक अनुभव मजबूत रहा है। तमिलनाडु में भाजपा को मजबूती देने में उनकी अहम भूमिका रही है।

  • तमिलिसाई सौंदर्यराजन: तमिलनाडु भाजपा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और तेलंगाना की राज्यपाल रह चुकीं तमिलिसाई, दक्षिण भारत में पार्टी के लिए एक भरोसेमंद चेहरा हो सकती हैं।

  • डी. पुरंदेश्वरी: एनटी रामाराव की बेटी और वर्तमान आंध्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं। वे कांग्रेस में मंत्री रह चुकी हैं और अब भाजपा के लिए आंध्र और तेलंगाना में जनाधार बढ़ाने में कारगर मानी जा रही हैं।

राज्यों में भी संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पार्टी को केवल केंद्रीय नेतृत्व ही नहीं, बल्कि राज्यों में भी संगठनात्मक मजबूती की जरूरत है। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी लगभग आधा दर्जन राज्यों में नए अध्यक्षों के नाम तय कर चुकी है, जिनकी घोषणा इसी सप्ताह की जा सकती है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा जल्द संभव

भाजपा सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक घोषणा एक सप्ताह के भीतर की जा सकती है। हालांकि पार्टी ने इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि भाजपा अब नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर है।

आम आदमी की सेहत से खिलवाड़, 1000 किलो नकली पनीर जब्त

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रायपुर, 17 अप्रैल: राजधानी रायपुर में एक बार फिर नकली पनीर के गोरखधंधे का खुलासा हुआ है, जिससे न सिर्फ शहरवासियों की सेहत को खतरा पैदा हुआ है, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। गुरुवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने गोकुल नगर स्थित एक डेयरी पर बड़ी छापेमारी कर लगभग 1000 किलो डिब्बाबंद नकली पनीर जब्त किया है। यह नकली पनीर भोपाल और मुरैना से मंगाया जा रहा था और रायपुर समेत छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कई हिस्सों में इसकी आपूर्ति की जा रही थी।

छापेमारी के दौरान डेयरी का संचालन कर रहा सौरभ शर्मा एक बार फिर संदेह के घेरे में आया है। जानकारी के अनुसार, सौरभ पूर्व में भी नकली पनीर के कारोबार में पकड़ा जा चुका है, लेकिन फिर भी उसने इस अवैध कारोबार को बंद नहीं किया। इस बार उसके खिलाफ दोबारा कार्रवाई की गई है, जिससे साफ होता है कि नकली खाद्य पदार्थों का यह कारोबार सख्त निगरानी के बावजूद लगातार पनप रहा है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने डेयरी से पनीर के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने तक संबंधित डेयरी को सील कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पनीर की गुणवत्ता और उसमें मिलाए गए रसायनों की पुष्टि रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

इस घटना ने एक बार फिर आम जनता की सेहत पर मंडराते खतरे को उजागर किया है। नकली और मिलावटी पनीर के सेवन से लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें फूड पॉयजनिंग, लिवर डैमेज, एलर्जी और पेट से जुड़ी बीमारियां प्रमुख हैं। यह मामला इस बात का भी संकेत है कि नकली पनीर का गिरोह अब भी सक्रिय है और हर रोज हजारों लोगों की थाली में जहर परोस रहा है।

खाद्य एवं औषधि विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे पैकेज्ड पनीर खरीदते समय ब्रांड, निर्माण तिथि और एफएसएसएआई नंबर की जांच जरूर करें। साथ ही अगर किसी को कहीं नकली या संदिग्ध खाद्य सामग्री की जानकारी मिले, तो तुरंत विभाग को सूचित करें।

अब सवाल यह उठता है कि पूर्व में पकड़े जा चुके कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जिससे वे दोबारा इस कारोबार को शुरू करने की हिम्मत न करते? क्या केवल डेयरी सील कर देना पर्याप्त है या जरूरत है कि इस नेटवर्क की पूरी जड़ तक पहुंचा जाए?

इस मामले की पूरी जांच जारी है और प्रशासन का दावा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जब तक सख्त सजा और निरंतर निगरानी नहीं होगी, तब तक ऐसे मिलावटखोरों का साहस बना रहेगा और जनता की थाली में नकली स्वाद के साथ-साथ खतरा भी परोसा जाता रहेगा।

रात के अंधेरे में मौत का सफर, बालोद में गयी युवक की जान

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Road Accident: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बेहद दुखद सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जिसमें एक युवक की जान चली गई। यह हादसा बुधवार देर रात करीब 9:30 बजे दल्लीराजहरा मुख्य मार्ग पर स्थित जमही टोल प्लाजा के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने एक बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे स्थानीय राहगीरों ने बिना समय गंवाए घायल युवक को बालोद जिला अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान किल्लेकोड़ा निवासी प्रीतम कुमार के रूप में की जा रही है, हालांकि पुलिस ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि मृतक की शिनाख्त के लिए परिजनों से संपर्क किया जा रहा है, और जैसे ही वे पहुंचते हैं, गुरुवार को शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।

बालोद थाना प्रभारी रविशंकर पांडेय ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि घटना के बाद अज्ञात वाहन घटनास्थल से फरार हो गया है। वाहन और उसके चालक की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या की धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र रात के समय बेहद अंधेरा रहता है और पहले भी यहां दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने प्रशासन से सड़क पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था और स्पीड ब्रेकर की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि क्षेत्र की सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। पुलिस फिलहाल मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और जल्द ही वाहन और आरोपी चालक की पहचान कर गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी जीत, कोण्डागांव मुठभेड़ में दो इनामी नक्सली मारे गए

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कोण्डागांव (छत्तीसगढ़) – छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता मिली है। जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने नारायणपुर सीमा से लगे किलम–मरकामपाल के घने जंगलों में मुठभेड़ के दौरान दो कुख्यात इनामी नक्सलियों को मार गिराया। यह मुठभेड़ मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात को हुई, जब पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि इलाके में 15 से 20 नक्सली सक्रिय हैं। सूचना मिलते ही त्वरित एक्शन टीम को इलाके में रवाना किया गया। जंगल में पहुंचते ही सुरक्षाबलों पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक मुठभेड़ चली। मुठभेड़ के शांत होने के बाद इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दो नक्सलियों के शव बरामद किए गए।

पुलिस अधीक्षक येदुवेल्ली अक्षय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मारे गए नक्सलियों की पहचान आमदई एरिया कमेटी के प्रमुख और ईस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी के सदस्य होलधर कश्यप तथा आमदई एरिया कमेटी के सदस्य रामे सोरी के रूप में हुई है। होलधर कश्यप पर आठ लाख और रामे सोरी पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों लंबे समय से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में सक्रिय थे और पुलिस को इनकी तलाश थी। मुठभेड़ के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई तो घटनास्थल से एक एके-47 राइफल, एक पिस्टल, जिंदा कारतूस, विस्फोटक सामग्री और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गईं। यह ऑपरेशन नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इस कार्रवाई को बड़ी रणनीतिक सफलता करार दिया है। इससे न सिर्फ क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों के हौसले पस्त होंगे, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशनों से नक्सल प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे शांति बहाल हो रही है। मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संभावित ठिकानों पर लगातार सर्चिंग की जा रही है ताकि किसी भी नक्सली गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

कुत्ते के बाद बकरा हुआ हैवानियत का शिकार, देखें वायरल वीडियो

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भोपाल, 17 अप्रैल: राजधानी भोपाल में पशु क्रूरता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक युवक को एक बकरे के पैर बांधकर उसे बुरी तरह पीटते हुए देखा जा सकता है। यह दिल दहला देने वाली घटना भोपाल के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित नूर महल इलाके के अल-रशीद अस्पताल के पास की बताई जा रही है। वीडियो में युवक बेजुबान बकरे के साथ बर्बरता की सारी हदें पार करता नजर आ रहा है। उसने न केवल बकरे के पैर कसकर बांधे, बल्कि उसे बार-बार लात-घूंसे और थप्पड़ों से मारा। वीडियो को देखकर सोशल मीडिया पर लोगों में गहरा आक्रोश है।

बताया जा रहा है कि आरोपी युवक का नाम नदीम उर्फ अल्फी है। जब वह यह कृत्य कर रहा था, उसी समय वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। हालांकि अभी तक इस घटना को लेकर पुलिस थाने में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन वीडियो के तेजी से वायरल होने और लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए जल्द ही पुलिस को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इस घटना के बाद पशु प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गुस्सा है। उनका कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी जानवर के साथ इस तरह की बर्बरता हुई हो। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं।

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से आरोपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। भारत में पशु क्रूरता के खिलाफ कानून मौजूद हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 429 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोग काफी सक्रिय हैं और #JusticeForBakra तथा #AnimalCruelty जैसे हैशटैग के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं। यह मामला न केवल एक बेजुबान जानवर के साथ अमानवीय व्यवहार का है, बल्कि समाज की उस संवेदनहीनता को भी उजागर करता है, जो आज भी जीवों के अधिकारों को गंभीरता से नहीं लेती।

अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन इस पर कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है। समाज की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाए और न्याय सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाए।

प्रदेश के 10 जिलों में हुआ रासायनिक औद्योगिक आपदा पर मॉक अभ्यास

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भोपाल, 17 अप्रैल: राज्य सरकार द्वारा नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से आज गुरुवार को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक मध्यप्रदेश के 10 जिलों में एक साथ रासायनिक औद्योगिक आपदा पर आधारित मॉक अभ्यास (Mock Drill) आयोजित किया गया था। इस अभ्यास का आयोजन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है।

इस मॉक ड्रिल का प्रमुख उद्देश्य यह है कि यदि भविष्य में कभी किसी औद्योगिक इकाई से रासायनिक गैस रिसाव या विषाक्त पदार्थ का प्रसार जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तो उससे प्रभावी ढंग से कैसे निपटा जा सके। यह अभ्यास प्रशासन, राहत और बचाव एजेंसियों के समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं का आकलन करने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही, आम नागरिकों को भी जागरूक किया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में कैसे शांत, सतर्क और सुरक्षित रहें।

10 जिलों में हुआ अभ्यास, ये हैं प्रमुख स्थान:

  • भोपाल: सेंट्रल पॉवर रिसर्च इंस्टीट्यूट (CPRI) के सामने

  • इंदौर: एचपीसीएल एलपीजी प्लांट, एबी रोड टोल प्लाज़ा के समीप, राउखेड़ी

  • इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर, देवास, उज्जैन, सागर, रतलाम, कटनी और विदिशा जैसे औद्योगिक रूप से सक्रिय जिलों में भी यह अभ्यास विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के पास किया गया है।

किस – किस ने लिया भाग:

मॉक ड्रिल में निम्नलिखित विभाग और एजेंसियां सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं:

  • जिला प्रशासन

  • पुलिस विभाग

  • फायर ब्रिगेड

  • राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF)

  • स्वास्थ्य विभाग

  • नगर निगम

  • रेड क्रॉस और अन्य स्वयंसेवी संगठन

  • पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण विभाग

इन सभी एजेंसियों को मिलकर एक काल्पनिक रासायनिक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को कैसे अंजाम देना है, इसका व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।

कैसे किया गया अभ्यास:

डिप्टी कलेक्टर एवं नोडल अधिकारी लाखन सिंह चौधरी ने बताया कि आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान एक रासायनिक रिसाव जैसी काल्पनिक स्थिति निर्मित की गई थी। परिकल्पना के अनुसार, एक औद्योगिक इकाई से गैस के रिसाव की स्थिति मानी गई, जिसके बाद तत्काल चेतावनी जारी की गई और आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। राहत और बचाव दल मौके पर सक्रिय हुए तथा घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराकर अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पूरा अभ्यास वास्तविक आपात स्थिति की तरह किया गया ताकि संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया समय और आपसी समन्वय का परीक्षण किया जा सके।

नागरिकों से अपील:

डिप्टी कलेक्टर चौधरी ने कहा कि यह अभ्यास पूरी तरह से एक प्रशिक्षण प्रक्रिया है और इससे आम नागरिकों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। नागरिकों से अपील की गई है कि:

  • मॉक अभ्यास के दौरान शांति बनाए रखें

  • किसी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें

  • प्रशासन के निर्देशों का पालन करें

  • अपने आसपास के लोगों को भी सही जानकारी दें

  • यदि किसी को असुविधा हो, तो तुरंत निकटतम प्रशासनिक अधिकारी या कंट्रोल रूम से संपर्क करें

मॉक ड्रिल क्यों है जरूरी:

वर्तमान समय में तेजी से बढ़ते औद्योगिक विस्तार और रासायनिक इकाइयों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि प्रशासन और आम जनता दोनों आपदा की किसी भी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहें। भोपाल गैस त्रासदी जैसे अतीत के अनुभवों से सबक लेते हुए अब प्रशासनिक तंत्र को कहीं अधिक सजग और सक्षम बनाने की दिशा में यह प्रयास किया जा रहा है। यह मॉक अभ्यास यह सुनिश्चित करने का एक सशक्त कदम है कि यदि भविष्य में कोई वास्तविक रासायनिक आपदा हो, तो उससे प्रभावी रूप से निपटने में कोई चूक न हो।

मध्यप्रदेश शासन द्वारा किया जा रहा यह समन्वित मॉक अभ्यास राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावशाली प्रयास है। इसके माध्यम से न केवल प्रशासनिक मशीनरी की दक्षता को परखा जा रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी आपातकालीन स्थिति में सतर्क और सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

मन्नत बनी मौत की वजह, तमिलनाडु में अग्निकुंड में गिरा भक्त

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चेन्नई – तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के एक धार्मिक उत्सव में आस्था का प्रदर्शन एक भयानक हादसे में तब्दील हो गया। कुयावनकुडी के प्रसिद्ध सुब्बैया मंदिर में आयोजित थीमिधि थिरुविझा उत्सव के दौरान 56 वर्षीय भक्त केशवन की जलते अंगारों में गिरने से मौत हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने लोगों को भावुक और स्तब्ध कर दिया है।

आस्था और अनुष्ठान की भयानक परिणति
वालंथरावाई गांव के निवासी केशवन, अपनी मन्नत पूरी होने के बाद परंपरागत अग्नि-चलन अनुष्ठान में भाग ले रहे थे। यह प्रथा हर साल आयोजित होती है, जिसमें श्रद्धालु नंगे पांव जलते अंगारों पर चलते हैं। संतुलन बिगड़ने के कारण केशवन अचानक अंगारों में गिर पड़े। मंदिर परिसर में मौजूद बचावकर्मियों ने तत्काल उन्हें बाहर निकाला और गंभीर रूप से झुलसी हालत में रामनाथपुरम जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद केशवन को बचाया नहीं जा सका।

थीमिधि थिरुविझा उत्सव 10 अप्रैल से शुरू हुआ था, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ हिस्सा लेते हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है—हाल ही में अवरंगाडु में भी एक व्यक्ति अपने छह माह के शिशु के साथ अग्निकुंड में गिर पड़ा था। उस हादसे का वीडियो भी वायरल हुआ था और इस तरह के जोखिम भरे अनुष्ठानों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या परंपराओं के नाम पर जीवन से खिलवाड़ किया जाना उचित है? प्रशासन, आयोजकों और समाज को मिलकर ऐसे आयोजनों के दौरान सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देनी होगी ताकि श्रद्धा के साथ-साथ जीवन की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

लड़की की आवाज में शादी का वादा, पार हुए करोड़ो रुपये

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इंदौर, मध्यप्रदेश: इंदौर में एक चौंकाने वाला ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक एनआरआई युवक को शादी का झांसा देकर करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। घटना की शुरुआत एक मैट्रिमोनियल साइट से हुई, जहां युवक को ‘सिमरन’ नाम की एक युवती से विवाह प्रस्ताव मिला। आकर्षक प्रोफाइल और विनम्र व्यवहार ने युवक का विश्वास जीत लिया, लेकिन वह नहीं जानता था कि उसके साथ एक बड़ा साइबर फ्रॉड होने वाला है।

शुरुआत में सामान्य बातचीत व्हाट्सएप पर पहुंची और फिर वीडियो कॉल्स होने लगीं। ‘सिमरन’ खुद को पढ़ी-लिखी, संस्कारी और पारिवारिक लड़की बताकर युवक से भावनात्मक रिश्ता बनाने लगी। बातचीत के दौरान एक अन्य युवक ने भी भूमिका निभाई और सॉफ्टवेयर की मदद से लड़की की आवाज में युवक से बात करता रहा। कुछ महीनों की बातचीत और भरोसे के बाद सिमरन ने शादी की योजना का हवाला देकर युवक से कभी वीजा, कभी दहेज, तो कभी पारिवारिक परेशानियों के नाम पर कई किस्तों में पैसे ऐंठे। जब युवक को शक हुआ, तब तक वह करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर चुका था।

एक वीडियो कॉल के दौरान जब युवक को प्रोफाइल की तस्वीर वाली लड़की नजर नहीं आई, तो उसे ठगी का एहसास हुआ। वह तत्काल भारत आया और इंदौर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया, जिन्होंने जांच में पाया कि इस फरेब के पीछे ‘विशाल’ नाम का युवक मास्टरमाइंड है। पुलिस ने आरोपी विशाल को अहमदाबाद से और सिमरन को इंदौर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि इनके पास कई फर्जी बैंक अकाउंट हैं, जिनके जरिए देश के विभिन्न राज्यों से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। आरोपियों ने सॉफ्टवेयर के जरिए वॉयस चेंज कर कई लोगों को झांसे में लेने की बात कबूल की है।

एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, सिमरन को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि विशाल का रिमांड 21 तारीख तक बढ़ाया गया है। बैंक खातों की जानकारी इकट्ठा की जा रही है और संपत्तियों की जांच जारी है। पुलिस को आशंका है कि ये गिरोह अन्य लोगों को भी इसी तरह ठग चुका है। यह मामला साइबर अपराध के नए तरीकों की गंभीर चेतावनी है, खासकर उन लोगों के लिए जो ऑनलाइन रिश्तों पर भरोसा करते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन संबंध में आर्थिक लेन-देन करने से पहले पूरी जांच और सतर्कता बरतें।