Income Tax Appeals: आईटीएटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.वी. भडंग का रायपुर दौरा: नवा रायपुर में दो दिवसीय डिवीजन बेंच शुरू

Income Tax Appeals: रायपुर। छत्तीसगढ़ की विधिक और न्यायिक विधाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए, आयकर अपीलीय अभिकरण (ITAT) के केंद्रीय अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त माननीय न्यायमूर्ति श्री सी. वी. भडंग (मुंबई) तथा उपाध्यक्ष (पुणे क्षेत्र) श्री आर. के. पांडा रविवार को राज्य की राजधानी रायपुर पहुंचे। न्यायमूर्ति पद की विधिक कमान संभालने के उपरांत श्री भडंग का छत्तीसगढ़ राज्य का यह पहला आधिकारिक दौरा है, जिसे कर कानूनों के विसर्जन और त्वरित न्याय की दिशा में बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है।

आधिकारिक विधिक कार्यक्रम के अनुसार, दोनों शीर्ष न्यायिक प्राधिकारी सोमवार 29 जून तथा मंगलवार 30 जून 2026 को नवा रायपुर स्थित ‘केन्द्रीय सचिवालय परिसर’ में संचालित आईटीएटी रायपुर पीठ में विशेष डिवीजन बेंच (खण्डपीठ) की विधिक कार्यवाही का संचालन करेंगे और इस दौरान राज्य भर से लंबित पड़े महत्वपूर्ण व जटिल आयकर अपीलों की सघन विधिक सुनवाई कर उनका निस्तारण सुनिश्चित करेंगे।

विधिक मनीषियों और चार्टर्ड एकाउंटेंट्स द्वारा भव्य अभिनंदन, करदाताओं को शीघ्र न्याय दिलाने पर बल

इस ऐतिहासिक अवसर को रेखांकित करते हुए ‘आईटीएटी बार एसोसिएशन’ की प्रबंध समिति के अध्यक्ष एडवोकेट श्री एस. आर. राव, उपाध्यक्ष सीए आर. बी. दोशी, सचिव सीए राजेश चावड़ा और कार्यकारिणी के अन्य विधिक पदाधिकारियों द्वारा होटल बेबीलोन में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस विधिक कॉन्क्लेव में भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) रायपुर शाखा के सदस्य, चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी तथा रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर और कोरबा से बड़ी संख्या में आए विधिक अधिवक्ताओं एवं वरिष्ठ कर सलाहकारों ने हिस्सा लिया।

समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री भडंग ने करदाताओं के विधिक अधिकारों की रक्षा और अपीलों के पारदर्शी व समयबद्ध निस्तारण की प्रतिबद्धता को दोहराया।

“न्यायिक निर्णयन में मानवीय मनीषा का विकल्प नहीं हो सकता AI”— न्यायमूर्ति सी.वी. भडंग की विधिक चेतावनी

अपने मुख्य संबोधन में न्यायमूर्ति श्री सी. वी. भडंग ने समकालीन विधिक परिदृश्य में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के समावेश पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत व विधिक मार्गदर्शिका प्रस्तुत की। उन्होंने स्वीकार किया कि एआई तकनीक विशाल वित्तीय डेटा के त्वरित विश्लेषण, जटिल कर विसंगतियों के विसर्जन और केस-लॉ की सटीक व त्वरित खोज में एक उत्कृष्ट विधिक उपकरण (Tool) सिद्ध हो सकती है।

परंतु, इसके अंधाधुंध और अविवेकपूर्ण उपयोग पर गहरी विधिक चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी को कड़ी चेतावनी दी। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि:

“बिना मनीषा (Application of Mind) के, केवल मशीनी एल्गोरिदम के आधार पर किया गया एआई का उपयोग न्यायिक और विधिक निर्णय प्रक्रिया के लिए अत्यंत दंडात्मक और आत्मघाती साबित हो सकता है। एआई केवल एक सहायक विधिक साधन है, यह कभी भी मानव बुद्धि, न्यायिक दृष्टि और न्यायाधीशों के अंतर्निहित विधिक विवेक का विकल्प नहीं बन सकता।”

उन्होंने वकीलों और विभागीय विधिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे तकनीकी उपकरणों का उपयोग केवल रिसर्च तक सीमित रखें, न कि इसे विधिक अंतिम निर्णय का आधार बनाएं।

विधिक पेचीदगियों और वित्तीय लेखांकन मानकों पर साझा किए विचार

सम्मान समारोह के दौरान उपाध्यक्ष श्री आर. के. पांडा ने विभिन्न जोन में अपीलों के निपटारे के दौरान आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों और समयबद्ध निर्णयों के विधिक महत्व को साझा किया। वहीं, आईटीएटी रायपुर पीठ के न्यायिक सदस्य श्री पार्थ सारथी चौधरी ने नवीनतम विधिक नजीरों (Precedents) और अपीलीय संहिताओं के तकनीकी बिंदुओं पर प्रकाश डाला, जबकि लेखा सदस्य श्री अवधेश मिश्रा ने कर निर्धारण से जुड़े वित्तीय लेखांकन मानकों (Accounting Standards) और व्यावहारिक विसंगतियों का विधिक विसर्जन किया।

इस महत्वपूर्ण दौरे और विधिक सत्रों से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक व व्यावसायिक जगत में आयकर विवादों के त्वरित और न्यायसंगत समाधान की एक नई विधिक चेतना का संचार होने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है।

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