निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : ईरान के साथ जारी युद्ध अब अमेरिका के लिए ही मुश्किलें खड़ी करता नजर आ रहा है। इस संघर्ष का असर न केवल वैश्विक स्तर पर दिख रहा है, बल्कि अमेरिकी राजनीति और सरकार के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसलों और बयानों ने यह संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है।
जंग लंबी खिंची, दावे पड़े भारी
अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि यह युद्ध 2 से 4 दिनों में समाप्त हो जाएगा। लेकिन अब पांच सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी संघर्ष जारी है, जिससे उनकी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
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सरकार के अंदर बढ़ते मतभेद
सूत्रों के मुताबिक, ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर मतभेद सामने आ रहे हैं। हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को पद से हटाने के फैसले ने भी इन अटकलों को और मजबूत किया है कि ट्रंप अपनी टीम में बड़े बदलाव कर सकते हैं।
गिरती लोकप्रियता बनी चिंता
युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई और तेल संकट का असर आम जनता पर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से लोगों में नाराजगी बढ़ी है। इसी का असर ट्रंप की लोकप्रियता पर भी पड़ा है, जो घटकर करीब 36% तक पहुंच गई है—यह उनके कार्यकाल का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।
टीम में बदलाव की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप अपनी छवि सुधारने और हालात संभालने के लिए कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी कर रहे हैं। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक जैसे बड़े नामों पर भी बदलाव की आशंका जताई जा रही है।
जनता की बंटी राय
अमेरिका में इस युद्ध को लेकर जनता की राय भी विभाजित है। करीब 60% लोग इस जंग के खिलाफ बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि इस संघर्ष से केवल महंगाई बढ़ेगी और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वह युद्ध, महंगाई और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन कैसे बनाए।











