सिंगरौली। भाजपा की सिंगरौली जिला कार्यकारिणी के गठन के बाद पार्टी में हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि इस बार सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह और सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक के समर्थित पदाधिकारी कार्यकारिणी में जगह नहीं बना पाए।
सूत्रों के अनुसार, इस बार जिला कार्यकारिणी में प्रदेश उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री, जिलाध्यक्ष और देवसर विधायक के प्रभाव का दबदबा देखा जा रहा है। पार्टी में चर्चा है कि यह रणनीति आगामी नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत बनाई गई है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, जिला कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारी मुख्यतः उन्हीं नेताओं के करीबी हैं जिन्होंने लगातार अपनी सक्रियता और पार्टी के लिए काम दिखाया। इसमें सुरेन्द्र बैस, विजया सिंह पटेल, लालपति साकेत, योगेन्द्र द्विवेदी, हर्ष सिंह, रेखा यादव, संदीप झा, कांतेदव सिंह, राधा सिंह, पूनम गुप्ता, कृष्ण कुमार कुशवाहा, विनोद चौबे, विक्रम सिंह चंदेल, अंजनी जायसवाल, विजय बैस, आलोक यादव, सुमन सिंह, प्रदीप शाह, राजेन्द्र मेश्राम, प्रीति पनाड़िया और द्रोपदी सिंह के नाम प्रमुख हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि कार्यकारिणी के गठन के पीछे एक रणनीति है—सांसद और विधायकों को राजनीतिक रूप से कमजोर करना और साथ ही अपने समर्थकों को मजबूत पदों पर बैठाकर उन्हें लगातार जयकारी करते रहने के लिए प्रेरित करना।
इस विवाद के चलते पार्टी में हल्की खींचतान और सवाल-जवाब की स्थिति उत्पन्न हो गई है, और कार्यकर्ता धीरे-धीरे जिला कार्यकारिणी सूची को लेकर अपने सवाल उठाने लगे हैं।











