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Tata Sons IPO पर टाटा ग्रुप में बढ़ा मतभेद! नोएल टाटा बनाम ट्रस्टी आमने-सामने, आज हो सकता है फैसला

Tata Sons IPO : भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप इन दिनों एक बड़े अंदरूनी विवाद का सामना कर रहा है। विवाद की वजह है टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग।

जहां टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा लिस्टिंग के खिलाफ बताए जा रहे हैं, वहीं ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ सदस्य RBI के नियमों का हवाला देते हुए IPO लाने के पक्ष में हैं।आने वाले दिनों में यह विवाद भारत के कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े IPO का रास्ता भी खोल सकता है।

Tata Sons IPO विवाद क्या है?

 टाटा ग्रुप में विवाद की असली वजह क्या है?

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद इस बात को लेकर है कि क्या टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या नहीं।

टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह IPO के समर्थन में हैं। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।दूसरी ओर, नोएल टाटा चाहते हैं कि टाटा संस एक निजी और क्लोजली हेल्ड कंपनी बनी रहे।

RBI का कौन सा नियम टाटा संस पर दबाव बना रहा है?

RBI के नए नियमों के अनुसार, जिन NBFC कंपनियों की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होगा।1 जुलाई 2026 से टाटा संस को ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ NBFC माना जा सकता है, इसलिए उस पर यह नियम लागू होगा।

क्या टाटा ग्रुप पहले भी लिस्टिंग टाल चुका है?

हाँ।

2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर लेयर NBFC’ कैटेगरी में रखा था। उस समय कंपनी ने कर्ज पुनर्गठन और अन्य तकनीकी उपायों के जरिए लिस्टिंग टाल दी थी।लेकिन अब RBI ने नियम और सख्त कर दिए हैं।

8 मई की बैठक क्यों अहम मानी जा रही है?

8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की अहम बोर्ड बैठक होने वाली है।सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में IPO प्रक्रिया शुरू करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा जा सकता है। साथ ही नए ट्रस्टी नॉमिनी पर भी चर्चा होगी।

नोएल टाटा IPO के खिलाफ क्यों हैं?

नोएल टाटा को आशंका है कि लिस्टिंग के बाद टाटा ट्रस्ट्स का समूह पर नियंत्रण कमजोर हो सकता है।फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी है, जिससे समूह के रणनीतिक फैसलों पर उसका मजबूत प्रभाव बना रहता है।

चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का क्या रुख है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एन. चंद्रशेखरन ने नोएल टाटा को लिस्टिंग रोकने की कोई गारंटी देने से इनकार कर दिया था।उनका कहना था कि यह मामला पूरी तरह रेगुलेटरी है और कंपनी को RBI के नियमों का पालन करना होगा।

क्या RBI टाटा ग्रुप को राहत दे सकता है?

इसकी संभावना बेहद कम मानी जा रही है।सूत्रों के अनुसार RBI किसी भी बड़ी कंपनी के लिए नियमों में अपवाद बनाने के मूड में नहीं है, क्योंकि इससे दूसरे कॉरपोरेट समूह भी ऐसी मांग कर सकते हैं।

Tata Sons IPO से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?

सबसे बड़ा फायदा शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप को हो सकता है।मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है, जो फिलहाल अनलिस्टेड होने के कारण आसानी से नकदी में नहीं बदली जा सकती।IPO आने पर इस हिस्सेदारी की वैल्यू काफी बढ़ सकती है।

 शापूर मिस्त्री परिवार की संपत्ति पर क्या असर पड़ेगा?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है।इसमें बड़ा हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है। लिस्टिंग होने पर यह संपत्ति खुलकर सामने आ सकती है और SP Group का कर्ज बोझ भी कम हो सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

अगले कुछ महीनों में तस्वीर साफ हो सकती है।अगर ट्रस्ट के अंदर IPO समर्थक पक्ष मजबूत रहा, तो भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट IPO देखने को मिल सकता है। वहीं, अगर नोएल टाटा की राय प्रभावी रही, तो कंपनी फिर कोई वैकल्पिक रास्ता तलाश सकती है।

नॉलेज पार्ट

शैडो बैंक (NBFC) क्या होता है?

NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी ऐसी संस्थाएं होती हैं जो कर्ज और फाइनेंसिंग सेवाएं देती हैं, लेकिन उनके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता।

क्या है Tata Sons क्या है?

टाटा संस टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी है, जो TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी कई बड़ी कंपनियों को नियंत्रित करती है। वर्तमान में एन. चंद्रशेखरन इसके चेयरमैन हैं।

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