Suryakant Chief Justice of India : दिल्ली। भारत की न्यायपालिका आज एक नए अध्याय में प्रवेश कर गई है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद की शपथ दिलाई। जस्टिस बीआर गवई के रिटायरमेंट के बाद वे देश के नए न्यायिक प्रमुख बने हैं। उनका कार्यकाल करीब 15 महीने का होगा और वे 9 फरवरी 2027 तक सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व करेंगे।
Suryakant Chief Justice of India : शपथ समारोह में सात देशों के CJI हुए शामिल
ऐतिहासिक शपथ समारोह में देश-दुनिया की कई महत्वपूर्ण हस्तियाँ मौजूद रहीं। सात देशों के मुख्य न्यायाधीशों की मौजूदगी ने इस अवसर को और भी खास बना दिया।
370 से लेकर पेगासस तक—कई ऐतिहासिक फैसलों में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कई बड़े और संवैधानिक रूप से अहम मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई है—
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आर्टिकल 370 हटाने से जुड़े फैसले
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पेगासस स्पाइवेयर जांच से जुड़े मुद्दे
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बिहार वोटर लिस्ट विवाद
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राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर महत्वपूर्ण सुनवाई
इन मामलों ने उनके न्यायिक दृष्टिकोण और संविधान के प्रति गहरी समझ को साबित किया है।
एक मध्यमवर्गीय परिवार से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक का सफर
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा है।
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छोटे शहर से शुरू की वकालत
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2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से LLM में फर्स्ट क्लास फर्स्ट
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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में उल्लेखनीय फैसले
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2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक बेंचों का हिस्सा रहे
हाल की सुनवाई में भी दिखाई दूरदृष्टि
बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने पर उन्होंने चुनाव आयोग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।
इसके अलावा, राज्यपाल और राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रेसिडेंशियल रेफरेंस में शामिल बेंच का हिस्सा भी रहे—जिसका फैसला कई राज्यों की राजनीति और प्रशासन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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अब सुप्रीम कोर्ट को मिलेगा उनका नेतृत्व
मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद उनके सामने महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न, डिजिटल प्राइवेसी, जजों की नियुक्तियों और न्यायिक सुधारों जैसे अहम विषय होंगे।











