Surajpur Education Department Action : विष्णु कसेरा/सूरजपुर: सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लॉक अंतर्गत गणेशपुर में स्कूली बच्चों द्वारा की गई नारेबाजी के बाद शिक्षा विभाग द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गलत और भाजपा सरकार के दबाव में किया गया एक्शन बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों पर की गई कार्रवाई वापस नहीं ली गई, तो कांग्रेस जिला स्तर पर उग्र आंदोलन करेगी।
क्या है पूरा मामला? बीते दिनों एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के दौरे के दौरान गणेशपुर के स्कूली बच्चों ने रैली को देखते हुए नारेबाजी की थी। आरोप है कि बच्चों ने इस दौरान “हसदेव बचाने” के नारे लगाए थे। मामला संज्ञान में आने के बाद सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक (शिक्षा) ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्कूल के प्रधान पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और दो अन्य शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
कांग्रेस का पक्ष: लंच टाइम में पाबंदी क्यों? जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि जब यह घटना हुई, तब स्कूल में लंच टाइम (भोजन अवकाश) चल रहा था। बच्चे लंच टाइम में बाहर निकले थे और रैली को देखकर उन्होंने अपनी भावनाओं के अनुरूप नारे लगाए। उन्होंने सवाल उठाया कि लंच टाइम में बच्चों की गतिविधियों के लिए शिक्षकों को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है? क्या भाजपा सरकार अब बच्चों और शिक्षकों की अभिव्यक्ति की आजादी पर भी पहरा बैठाएगी?
आंदोलन की चेतावनी: शशि सिंह ने आरोप लगाया है कि स्थानीय भाजपा नेताओं के दबाव में आकर प्रशासन ने शिक्षकों को बलि का बकरा बनाया है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वे इस ‘दबावपूर्ण’ कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पार्टी ने मांग की है कि निलंबित प्रधान पाठक को तत्काल बहाल किया जाए और शिक्षकों पर की गई अन्य कार्रवाई निरस्त की जाए। मांग पूरी न होने की स्थिति में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन के घेराव की बात कही है।











