Tuesday, August 18, 2026
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Maa Saraswati Jayanti : वसंत पंचमी : ज्ञान, संगीत और प्रकृति के नव-सृजन का महापर्व…लेख : ऋषिकेश मिश्रा

Maa Saraswati Jayanti : भारतीय संस्कृति पर्वों और उत्सवों की संस्कृति है, लेकिन वसंत पंचमी का स्थान इन सबमें विशिष्ट है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के नव-श्रृंगार और मानवीय चेतना के जागरण का दिवस है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व हमें संदेश देता है कि पतझड़ का अंत निश्चित है और नव-सृजन ही जीवन का शाश्वत सत्य है।

ऋतुराज वसंत का आगमन : वसंत को सभी ऋतुओं का राजा यानी ‘ऋतुराज’ कहा जाता है। कड़कड़ाती ठंड के बाद जब प्रकृति अपनी पुरानी केंचुली उतारकर गुनगुनी धूप की चादर ओढ़ती है, तब वसंत का आगमन होता है। खेतों में लहलहाती पीली सरसों, आम के पेड़ों पर आए बौर और पलाश के दहकते फूल यह बताते हैं कि धरती अब मुस्कुरा रही है। यह समय न तो अधिक उष्ण होता है और न ही अधिक शीतल, जो इसे स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ बनाता है।

माँ शारदा का प्राकट्य दिवस : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के निर्माण के समय चारों ओर मौन व्याप्त था। तब भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल छिड़ककर एक चतुर्भुजी शक्ति को प्रकट किया, जिनके हाथों में वीणा, पुस्तक और माला थी। जैसे ही उन्होंने अपनी वीणा के तार झनझनाए, संसार को वाणी मिली, नदियों को कलकल का स्वर मिला और हवाओं को सरसराहट। वह शक्ति साक्षात माँ सरस्वती थीं।

इसीलिए, वसंत पंचमी को ‘वागीश्वरी जयंती’ के रूप में भी मनाया जाता है। हमारा का मानना है कि “अस्त्र-शस्त्र की शक्ति से बड़ा प्रभाव शास्त्र और ज्ञान की शक्ति का होता है। जहां सरस्वती का वास है, वहां विनम्रता और विवेक स्वतः ही चले आते हैं।”

पीले रंग का महत्व : इस पर्व पर पीले रंग की प्रधानता देखने को मिलती है। पीला रंग केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि ऊर्जा, प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं और भोजन में भी केसरिया भात या पीले मिष्ठान्न का भोग लगाते हैं। यह रंग हमें डिप्रेशन और नकारात्मकता से दूर कर उत्साह की ओर ले जाता है।

आज के दौर में जब हम तकनीक और दौड़-भाग में उलझे हुए हैं, वसंत पंचमी हमें ठहरकर प्रकृति के संगीत को सुनने का अवसर देती है। यह दिन विद्यार्थियों, कलाकारों और संगीत-साधकों के लिए अपनी साधना को पुनः समर्पित करने का दिन है।

आइए, इस वसंत पंचमी पर हम माँ सरस्वती से केवल सफलता नहीं, बल्कि सद्बुद्धि की प्रार्थना करें। अपने भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीप जलाएं।

वसंत पंचमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ!…

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