MP Teachers OPS : निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षकों से जुड़ी पुरानी पेंशन योजना यानी OPS के मामले में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद, जिसमें कुछ शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने का रास्ता साफ हुआ था, अब स्कूल शिक्षा विभाग इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है।विभाग की ओर से रिव्यू याचिका दाखिल करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में 5 अक्टूबर को जबलपुर में वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों की बैठक प्रस्तावित है।
यह पूरा मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है, जो 1 जनवरी 2005 से पहले नियुक्त हुए थे। हाईकोर्ट के फैसले में ऐसे शिक्षकों को नई पेंशन व्यवस्था के बजाय पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने की बात सामने आई थी।इस फैसले के बाद संबंधित शिक्षकों के बीच उम्मीद जगी थी कि उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, फैसले के बाद करीब तीन महीने बीतने के बावजूद विभाग की ओर से इसे लागू करने को लेकर अभी तक अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।अब विभाग फैसले के कानूनी पहलुओं पर दोबारा विचार कर रहा है।
5 अक्टूबर को जबलपुर में होगी अहम बैठक
स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों और वकीलों की 5 अक्टूबर को जबलपुर में बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में हाईकोर्ट के फैसले के कानूनी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।मुख्य तौर पर यह देखा जाएगा कि फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर करने की स्थिति बनती है या नहीं। इसके अलावा सरकार के सामने आने वाले वित्तीय और प्रशासनिक प्रभावों पर भी विचार किया जा सकता है।बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विभाग हाईकोर्ट के फैसले को लेकर आगे कौन सा कानूनी कदम उठाता है।
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हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में दिया था फैसला
इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शिक्षकों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने पूर्व शिक्षाकर्मियों को नई पेंशन व्यवस्था से राहत देते हुए पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के निर्देश दिए थे।फैसले के बाद संबंधित शिक्षकों को उम्मीद थी कि उन्हें पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, विभाग की ओर से अब इस फैसले की समीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है।
सरकार के सामने वित्तीय भार की चुनौती
विभाग की ओर से फैसले पर पुनर्विचार की तैयारी के पीछे वित्तीय भार भी एक अहम कारण बताया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाता है, तो राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ सकती है।मामले में 1 जनवरी 2005 से पहले नियुक्त शिक्षकों का वर्ग प्रमुख रूप से प्रभावित होगा। इसी वजह से सरकार कानूनी विकल्पों के साथ फैसले के वित्तीय असर पर भी विचार कर रही है।
अब 80 हजार शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर
पुरानी पेंशन योजना से जुड़े इस मामले में फिलहाल अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। 5 अक्टूबर को होने वाली बैठक के बाद ही यह पता चलेगा कि स्कूल शिक्षा विभाग हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दाखिल करता है या नहीं।ऐसे में मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षक अब विभाग और सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। बैठक में होने वाली कानूनी चर्चा और उसके बाद लिए जाने वाले फैसले से यह तय होगा कि शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ कब और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा।






