Monday, August 31, 2026
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Mahakaleshwar Bhasma Aarti : ब्रह्म मुहूर्त में महाकाल की भस्म आरती, हर-हर महादेव से गूंजा उज्जैन

Mahakal Shringar Aarti
Mahakal Shringar Aarti

उज्जैन : उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के ब्रह्म मुहूर्त के दौरान भस्म आरती का अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। सुबह लगभग चार बजे जैसे ही मंदिर के गर्भगृह के पट खुले, पूरा महाकाल लोक “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। इस दुर्लभ और अलौकिक दर्शन के साक्षी बनने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आए श्रद्धालु भी मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।

वैदिक विधि से हुआ पंचामृत अभिषेक

भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का विधिवत वैदिक परंपरा के अनुसार पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से किए गए इस अभिषेक के दौरान गर्भगृह में रुद्र पाठ, शंखनाद और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु ध्यान और साधना में लीन नजर आए।

भस्म श्रृंगार में निहित जीवन का दर्शन

अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का भस्म श्रृंगार किया गया, जो सनातन परंपरा में जीवन की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। यह श्रृंगार भक्तों को यह संदेश देता है कि संसार क्षणभंगुर है और शिव ही शाश्वत सत्य हैं। दर्शन के दौरान कई श्रद्धालु भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आस्था के अश्रु छलकते नजर आए।

साधना और ध्यान में डूबा महाकाल लोक

भस्म आरती के समय संपूर्ण महाकाल लोक मंत्र-जप, ध्यान और साधना में डूबा हुआ दिखाई दिया। श्रद्धालुओं का मानना है कि भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का विशेष अवसर है। इस आरती में सम्मिलित होने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और मन को गहन शांति प्राप्त होती है।

सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती सनातन संस्कृति की एक अनमोल और जीवंत परंपरा है, जो प्रतिदिन भक्तों को जीवन, मृत्यु और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों से जोड़ती है। यही कारण है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग आज भी विश्वभर के श्रद्धालुओं की आस्था और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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