नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यदि निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कोई अवैधता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला पूरे भारत में प्रभावी होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR पर कोई आंशिक राय देने से इनकार किया। कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधता पर अंतिम बहस सुनने के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है। इससे पहले अदालत ने निर्देश दिया था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आधार कार्ड को 12वें वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
यह आदेश उन शिकायतों के बाद आया कि चुनाव अधिकारी पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि आधार नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है, फिर भी यह पहचान और निवास का वैध प्रमाण माना जाएगा।
विपक्षी दलों ने इस SIR ड्राइव की आलोचना की है और आरोप लगाया कि लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना उचित सत्यापन के मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 18 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 65 लाख नाम हटाए गए थे।
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चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाताओं को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से कहा कि वे अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करें या सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।













