मुंबई: एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले हाल ही में दिए अपने बयान के कारण विवादों में फंस गई हैं। उन्होंने अपने बच्चों के लिए आरक्षण की आवश्यकता से इनकार किया था, जिसके बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने उनकी आलोचना की। विवाद बढ़ने पर सुले ने अपने बयान पर सफाई दी और संविधान का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि उनका मत केवल व्यक्तिगत था।
सुले ने कहा, “मैंने खास तौर पर अपने बच्चों की बात की थी। मेरा पॉइंट केवल मेरे दो बच्चों तक सीमित था। मेरे बच्चे सशक्त और शिक्षित हैं, उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं है।”
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सुले ने जाति-आधारित आरक्षण की अहमियत को भी स्वीकार किया और कहा, “यह अभी भी जरूरी है। हमें सबको साथ लेकर चलना चाहिए। ये बाबासाहेब आंबेडकर का सपना था और मैं उनका सम्मान करती हूं। एससी-एसटी आरक्षण का मुद्दा पहले ही सेटल हो चुका है।”
वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने सुप्रिया के बयान को मराठा और अन्य समुदायों के खिलाफ बताया था। इस पर उन्होंने कहा, “विनम्रता के साथ अपील करती हूं कि लोग पूरा वीडियो देखें। मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि मेरा बयान केवल मेरे परिवार के बारे में था।”
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सुले ने पार्टी नेता राज राजापुरकर को मिल रही धमकियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि राज को तुरंत पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए और धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।













