मऊगंज: कानून कहता है कि गवाह स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन मऊगंज जिले के नईगढ़ी और लौर थाना क्षेत्र में यह सिद्धांत केवल कागज़ों तक सीमित नजर आ रहा है। यहां पुलिस के पास ऐसे “सुपर गवाह” हैं, जो एक ही दिन में कई मामलों के चश्मदीद बन जाते हैं। आबकारी, NDPS, मारपीट और शराब तस्करी—हर केस में वही नाम, वही चेहरे।
एक गवाह, सैकड़ों मुकदमे
CCTNS पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड से सामने आया है कि अमित कुशवाहा नामक व्यक्ति 500 से अधिक मामलों में गवाह बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग FIR में उसकी उम्र में वर्षों का अंतर होते हुए भी केवल एक साल की बढ़ोतरी दर्ज है। यह विरोधाभास पूरे केस मैनेजमेंट सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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सरकारी वाहन चलाता दिखा ‘स्वतंत्र गवाह’
पुलिस ने RTI के जवाब में दावा किया कि अमित कुशवाहा पुलिस का वाहन चालक नहीं है, लेकिन वीडियो फुटेज में वही व्यक्ति नईगढ़ी थाने की सरकारी गाड़ी चलाते कैमरे में कैद हुआ। आरोप है कि जहां-जहां थाना प्रभारी का तबादला होता है, वही गवाह वहां भी सक्रिय हो जाता है।
थाना प्रभारी की भूमिका सवालों के घेरे में
नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के कार्यकाल में इस कथित गवाह नेटवर्क के सबसे अधिक सक्रिय होने की बात सामने आई है। पूर्व में मानवाधिकार आयोग द्वारा जुर्माना लगाए जाने और अन्य मामलों में विवादों से घिरे रहने के चलते उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
80 वर्षीय बुजुर्ग पर फर्जी केस का आरोप
सबसे चौंकाने वाला मामला 80 वर्षीय बुजुर्ग नंदकुमार तिवारी का है, जिन्हें रात में लॉकअप में डाला गया। वायरल ऑडियो में यह स्वीकार किया गया कि बरामद वस्तु शराब नहीं बल्कि पेट्रोल थी, फिर भी केस आबकारी का बना दिया गया। यहां भी वही “पॉकेट गवाह” सामने आया।
क्या मैनुअल फाइलें खोलेंगी और बड़े राज?
जानकारों का मानना है कि CCTNS पर जो दिख रहा है, वह केवल आधी सच्चाई है। यदि पुरानी मैनुअल FIR और केस डायरियों की निष्पक्ष जांच हुई, तो फर्जी गवाहों और झूठे मुकदमों का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है।









