सिंगरौली : सीधी-सिंगरौली नेशनल हाइवे-39 का निर्माण 13 वर्षों से अधिक समय से चल रहा है, लेकिन सड़क आज भी चालकों के लिए जर्जर स्थिति में है। शासन ने बरसात से पहले 105 किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन अब तक सड़क की वास्तविक मरम्मत नहीं हुई।
मरम्मत में गोलमाल
सड़क का टेंडर सिंगरौली मिनरल्स कंपनी को मिला, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल लीपापोती और खानापूर्ति हुई। निर्माण एजेंसी और संविदाकार द्वारा डस्ट और गिट्टी डालकर पैचवर्क का दिखावा किया गया, जो बरसात में बह गई।
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सड़क की बदतर स्थिति
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सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, विशेषकर बहरी, कर्थुआ, कोहराखोह, गोरबी और मोरवा टाउन के पास।
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वाहन चालक गड्ढों में फंसकर रोजाना वाहन खराब होने की समस्या झेल रहे हैं।
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पैचवर्क और डामरीकरण का काम पूरी तरह से नहीं हुआ। केवल डस्ट और गिट्टी डालकर काम दिखाया गया।
यातायात पर असर
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बरसात के पहले सिंगरौली से सीधी का सफर 3-4 घंटे में पूरा होता था, अब 5-6 घंटे लगते हैं।
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सबसे खराब रोड बहरी के पास है, जहां गड्ढे घुटनों तक गहरे हो गए हैं और बारिश में वाहन फंस जाते हैं।
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नागरिकों की चिंता
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स्थानीय लोग और वाहन चालक सड़क की खस्ता हालत से परेशान हैं।
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अगर मरम्मत और पैचवर्क सही ढंग से किया गया होता, तो दोनों जिलों के यात्रियों और परिवहन व्यवसायियों को इतनी परेशानी नहीं होती।
बरसात के पहले स्वीकृत 10 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए, इसका कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। नेशनल हाइवे-39 की मरम्मत में प्रशासन और संविदाकार की लापरवाही का खामियाजा यात्री और स्थानीय नागरिक भुगत रहे हैं।













