SECL Baroud-Bijari mine : गौरीशंकर गुप्ता/घरघोड़ा (रायगढ़): रायगढ़ जिले के घरघोड़ा ब्लॉक स्थित एसईसीएल की बरौद-बिजारी खदान में सोमवार को युवा कांग्रेस नेता उस्मान बेग के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों का जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला। मूलभूत सुविधाओं और रोजगार की मांग

को लेकर भड़के इस जनाक्रोश के कारण खदान का काम 6 घंटे से अधिक समय तक पूरी तरह ठप्प रहा। एसईसीएल प्रबंधन ने आखिरकार 30 दिनों के भीतर सभी मांगें पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन स्थगित किया गया।
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ग्रामीणों का आरोप: विकास सिर्फ कागजों पर, गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित
सोमवार की सुबह बड़ी संख्या में प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने खदान के मुख्य द्वार पर पहुंचकर कंपनी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का मुख्य आरोप था कि एसईसीएल वर्षों से कोयला उत्पादन कर रही है और सरकार को अरबों रुपये की रॉयल्टी और डीएमएफ (DMF) राशि दे रही है, लेकिन खदान से सटे गांव आज भी बिजली, पानी, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी द्वारा किए जाने वाले सीएसआर (CSR) और विकास योजनाओं का लाभ केवल जिला मुख्यालय और बाहरी क्षेत्रों तक सीमित है, जबकि प्रभावित गांवों की दशा जस की तस बनी हुई है।

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उस्मान बेग ने साधा निशाना: आश्वासन नहीं, चाहिए हक
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा कांग्रेस नेता उस्मान बेग ने एसईसीएल और प्रशासन के खिलाफ तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “एसईसीएल का विकास सिर्फ कागज़ों पर है, ज़मीन पर नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने वर्षों से स्थानीय लोगों को केवल खोखले आश्वासन दिए हैं, लेकिन न तो युवाओं को रोजगार मिला है और न ही बुनियादी सुविधाएं। बेग ने कहा कि प्रभावित परिवार अब अपने हक के लिए सड़क पर उतर चुके हैं और सरकार की चुप्पी उनकी नाराज़गी को और बढ़ा रही है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार, प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, और अधूरे पड़े विकास कार्यों को तुरंत पूरा करना शामिल था।
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30 दिन का लिखित वायदा, आंदोलन स्थगित
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और एसईसीएल प्रबंधन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से लंबी बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। भारी विरोध और खदान का काम पूरी तरह ठप्प होने के कारण प्रबंधन को झुकना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों और एसईसीएल प्रबंधन ने ग्रामीणों को 30 दिनों के भीतर सभी मांगों पर कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया।
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उग्र घेराव की चेतावनी: ’30 दिन आखरी अल्टीमेटम’
आंदोलन स्थगित होने के बावजूद ग्रामीणों और युवा कांग्रेस नेताओं में आक्रोश कायम है। उस्मान बेग ने इसे पहला चरण बताते हुए स्पष्ट घोषणा की कि यह 30 दिन आखरी अल्टीमेटम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो अगला कदम रायगढ़ स्थित एसईसीएल जीएम कार्यालय का उग्र घेराव होगा। स्थानीय लोगों ने कंपनी और प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह आंदोलन जिलेभर में फैल जाएगा और एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।











