Operation Urja Suraksha : नई दिल्ली: वैश्विक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद भारत की रसोई गैस आपूर्ति के लिए सुखद खबर है। अगले 48 घंटों के भीतर दो विशाल एलपीजी टैंकर— BW Tyr और BW Elm — दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सफलतापूर्वक पार कर मुंबई और मंगलुरु बंदरगाह पहुंचने वाले हैं। इन जहाजों में कुल 94,000 टन एलपीजी लदी है, जो पूरे देश की लगभग तीन दिनों की घरेलू गैस जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
भारतीय नौसेना का ‘सुरक्षा कवच’ खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरों को देखते हुए भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के तहत अपने फ्रंटलाइन डिस्ट्रॉयर (युद्धपोत) तैनात किए हैं। नौसेना के जवान रडार और अत्याधुनिक तकनीक के जरिए भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। नौसेना की इस रणनीतिक तैनाती का ही परिणाम है कि अब तक कुल 6 जहाज (4 पहले और 2 अब) सुरक्षित रूप से इस खतरनाक जोन से बाहर निकल चुके हैं।
18 जहाज और 500 नाविक अब भी फंसे राहत के बीच चिंता की बात यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब भी 18 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर लगभग 500 भारतीय नाविक सवार हैं, जो युद्ध के साये में अपनी सुरक्षा का इंतजार कर रहे हैं। नाविकों के परिवार मुंबई, कोच्चि और विशाखापट्टनम में उनकी सुरक्षित वापसी की दुआएं कर रहे हैं। गौरतलब है कि तनाव शुरू होने के समय इस क्षेत्र में भारत के कुल 24 जहाज मौजूद थे।
ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिकी धमकियों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच इन दो टैंकरों का भारत पहुंचना मोदी सरकार और भारतीय नौसेना की बड़ी कूटनीतिक व सैन्य जीत मानी जा रही है।









