वॉशिंगटन / कीव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अलास्का डिप्लोमेसी अब सवालों के घेरे में है। 15 अगस्त को ट्रंप ने अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मुलाकात की, जिसे रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया गया था।
हालांकि, 15 दिन बाद भी युद्धविराम की दिशा में कोई सफलता नहीं मिली। इसके उलट, रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए। 16 अगस्त को 85 ड्रोन और एक इस्कंदर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला हुआ, जिसे यूक्रेन ने आंशिक रूप से रोक लिया।
20-21 अगस्त को रूस ने तीसरे बड़े हमले में 574 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागीं, जिसमें कीव, लीव, सुमी, चेर्निवत्सी और डिनीप्रोपेट्रोव्स्क के क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। इस हमले में 9 नागरिकों की मौत और 19 घायल हुए।
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28 अगस्त को रूस ने कीव पर सबसे बड़ा हमला किया, जिसमें 629 ड्रोन और मिसाइलों से शहर को निशाना बनाया गया। 14 नागरिक मारे गए और 48 घायल हुए। यूरोपीय यूनियन की इमारत को भी नुकसान पहुंचा।
यूक्रेन ने जवाबी हमले में रूस के तमबोव और ब्रायन्स्क क्षेत्रों में द्रुझबा पाइपलाइन और वोल्गोग्राद तथा रोस्तोव क्षेत्रों की तेल रिफाइनरियों पर हमला किया, जिससे हंगरी और स्लोवाकिया को रूसी तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई।
अलास्का बैठक में ट्रंप और पुतिन किसी ठोस सीजफायर पर नहीं पहुंचे। ट्रंप ने बैठक को प्रोडक्टिव बताया, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की अनुपस्थिति और रूस की मांगों के अस्वीकार के कारण संघर्ष बढ़ता रहा।
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जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी स्पष्ट कर दिया कि पुतिन और जेलेंस्की के बीच कोई बैठक फिलहाल नहीं होगी, जिससे स्पष्ट है कि शांति की संभावना अभी दूर है।











