निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें इंदौर से दवा सप्लाई करने वाला और दो स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हैं। तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
ट्रांसपोर्ट से खुला पूरा नेटवर्क
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ, जब गोगांव स्थित एक ट्रांसपोर्ट में नकली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये दवाएं इंदौर से मंगाई गई थीं और इन्हें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सप्लाई किया जा रहा था।
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मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग विभाग की टीम ने सारंगढ़ और भाठापारा के कई मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी की। जांच में पुष्टि हुई कि नकली दवाओं को स्थानीय दुकानों के माध्यम से बाजार में बेचा जा रहा था, जिससे आम लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा था।
वायरल वीडियो से बढ़ा मामला
इस केस में उस समय नया मोड़ आया, जब एक मेडिकल स्टोर संचालक और सहायक औषधि नियंत्रक संजय कुमार नेताम की मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में संदिग्ध गतिविधियां नजर आने के बाद अधिकारी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
आरोपी और उनका नेटवर्क
पुलिस ने इंदौर से सप्लाई करने वाले रोचक अग्रवाल, सारंगढ़ के खेमराम बानी और भाठापारा के सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि ये लोग संगठित तरीके से नकली दवाओं का कारोबार चला रहे थे।
स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, नकली दवाओं का यह नेटवर्क आम लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसी दवाएं न केवल बीमारी ठीक करने में असफल रहती हैं, बल्कि कई बार मरीज की हालत और बिगाड़ देती हैं।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस और ड्रग विभाग मामले की गहन जांच में जुटे हैं। इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।











