PM Modi Mann Ki Baat: मल्हार ताम्रपत्र खोज ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में मल्हार ताम्रपत्र खोज का उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की प्राचीन विरासत को खोजने और संरक्षित करने के ऐसे प्रयास नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
मल्हार ताम्रपत्र खोज ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के तहत सामने आई है। यह अभियान देश की प्राचीन धरोहरों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक साक्ष्यों को खोजने और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।बिलासपुर जिले की ऐतिहासिक नगरी मल्हार से प्राप्त इस खोज ने इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
क्या मिला है इस खोज में?
मल्हार ताम्रपत्र खोज के दौरान एक दुर्लभ ताम्रपत्र मिला है, जिसका वजन लगभग 3 किलोग्राम से अधिक बताया जा रहा है। यह ताम्रपत्र ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखित है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर अंकित लेख उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक जीवन और धार्मिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है।
‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है।
यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं। ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ये inscriptions छठी-सातवीं सदी के हैं, यानि चौदह-सौ,… pic.twitter.com/OQ5At4u7td
— BJP (@BJP4India) May 31, 2026
संजीव पांडेय के निवास से मिला ताम्रपत्र
मल्हार ताम्रपत्र खोज के तहत यह ऐतिहासिक दस्तावेज बिलासपुर निवासी संजीव पांडेय के घर से प्राप्त हुआ। प्रारंभिक अध्ययन में संकेत मिले हैं कि ताम्रपत्र किसी भूमि दान, शासकीय आदेश या विशेष घोषणा से जुड़ा हो सकता है।अब विशेषज्ञ इसकी विस्तृत जांच और अध्ययन में जुटे हुए हैं ताकि इसके वास्तविक ऐतिहासिक महत्व को समझा जा सके।
उम्र को लेकर सामने आए अलग-अलग अनुमान
मल्हार ताम्रपत्र खोज को लेकर शुरुआती जानकारी में इसे करीब 2000 वर्ष पुराना बताया गया था। हालांकि विशेषज्ञों के विस्तृत अध्ययन के बाद यह माना जा रहा है कि इन ताम्र पट्टिकाओं का संबंध पांडुवंशी राजवंश के शासनकाल से हो सकता है।इतिहासकारों के अनुसार ये ताम्रपत्र लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुराने हैं और संभवतः छठी या सातवीं सदी के दौरान तैयार किए गए थे।
पांडुवंशी राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन से जुड़ाव
मल्हार ताम्रपत्र खोज का संबंध पांडुवंशी राजवंश के प्रसिद्ध शासक महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल से जोड़ा जा रहा है।यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह खोज उस समय की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को समझने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
PM मोदी ने क्या कहा?
मल्हार ताम्रपत्र खोज का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की प्राचीन विरासत को सामने लाने वाले ऐसे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि देश का पुरातन ज्ञान केवल संग्रहालयों या पुरानी इमारतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।प्रधानमंत्री के अनुसार, इस प्रकार की खोजें नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जोड़ने का काम करती हैं।
इतिहासकारों में बढ़ा उत्साह
मल्हार ताम्रपत्र खोज के बाद पुरातत्वविदों और इतिहास विशेषज्ञों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखे गए लेखों का अध्ययन प्राचीन भारत की कई अनसुलझी ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
छत्तीसगढ़ की विरासत को मिली नई पहचान
मल्हार ताम्रपत्र खोज ने एक बार फिर साबित किया है कि छत्तीसगढ़ का इतिहास बेहद समृद्ध और गौरवशाली रहा है। मल्हार पहले से ही अपने प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों और पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता है।अब इस नई खोज के बाद यह क्षेत्र शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बन सकता है।









