Ken Betwa Protest: छतरपुर। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पिछले 10 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को अनोखा रूप देते हुए ‘चिता आंदोलन’ शुरू किया है, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
बारिश और आंधी भी नहीं डिगा सकी आंदोलन
छतरपुर और पन्ना जिले के प्रभावित गांवों में चल रहा यह आंदोलन लगातार जारी है। बारिश और तेज हवाओं के बावजूद प्रदर्शनकारी अपने धरना स्थल से नहीं हटे। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। ग्रामीण इसे केवल मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं।
24 गांव होंगे प्रभावित, 8 गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में
Ken Betwa Protest: केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत 24 गांवों के विस्थापन का प्रस्ताव है। इनमें 8 गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में शामिल हैं। इन्हीं गांवों के लोग सबसे ज्यादा विरोध कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि परियोजना के नाम पर उन्हें उनके पुश्तैनी घर और खेती से बेदखल किया जा रहा है, लेकिन बदले में उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं दिया जा रहा।
मुआवजे में अनियमितता का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि कई वास्तविक पात्र परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को नियमों के विपरीत अधिक राशि दे दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजा तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और इसमें गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।
चार वर्षों से जारी है विरोध
Ken Betwa Protest: ग्रामीणों के अनुसार, केन-बेतवा परियोजना की घोषणा के बाद से ही समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। हालांकि, अब जब बांध निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और गांवों के डूबने की आशंका बढ़ गई है, तब आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा दी जा रही मुआवजा राशि इतनी कम है कि उससे दूसरी जगह घर बनाना और खेती शुरू करना संभव नहीं है।
ये हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी सरकार से कई मांगें कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्रत्येक विस्थापित परिवार को तीन एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाए।
- पुनर्वास के लिए निर्धारित कट-ऑफ डेट वर्ष 2026 तक बढ़ाई जाए।
- मुआवजा वितरण में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- सभी प्रभावित परिवारों को समान और न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए।
10 दिन में 6 किलो वजन घटा, तबीयत बिगड़ने लगी
Ken Betwa Protest: आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ रही है। आंदोलनकारियों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में उनका 6 किलो से अधिक वजन कम हो चुका है। वहीं, लगातार बारिश और पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करने के कारण कई ग्रामीणों की तबीयत भी खराब हो रही है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई परिवारों के घरों में चूल्हा तक नहीं जल रहा है।
सरकार से बातचीत का इंतजार
आंदोलनकारियों का आरोप है कि अब तक न तो कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और न ही सरकार का कोई प्रतिनिधि उनकी मांगों पर बातचीत करने पहुंचा है। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आमरण अनशन और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाती है, लेकिन इसके साथ जुड़े विस्थापन, पुनर्वास और मुआवजे के मुद्दे अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।







