Indore Blackmail Case: इंदौर। शहर में एक शराब कारोबारी और एक आरटीआई एक्टिविस्ट के बीच शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि जिस कारोबारी ने सबसे पहले ब्लैकमेलिंग, मानहानि और कथित रंगदारी की शिकायत पुलिस से की थी, उसी के खिलाफ बाद में एफआईआर दर्ज हो गई। इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं और मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
14 जुलाई को कारोबारी ने दर्ज कराई थी शिकायत
Indore Blackmail Case: जानकारी के अनुसार, शराब कारोबारी सूरज रजक ने 14 जुलाई को लसूड़िया थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि राजेंद्र गुप्ता ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में उनके खिलाफ कथित रूप से झूठी और मानहानिकारक सामग्री साझा की। शिकायत में कहा गया कि इन संदेशों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यापारिक छवि को नुकसान पहुंचा।
सूरज रजक का आरोप है कि फोन पर बातचीत के दौरान उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई और रकम नहीं देने पर सोशल मीडिया व विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में और भी कथित दस्तावेज तथा संदेश वायरल करने की धमकी दी गई।
आईटी एक्ट और ब्लैकमेलिंग में कार्रवाई की मांग
शिकायत में सूरज रजक ने ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही मामले की प्रभावी जांच शुरू की।
दूसरे पक्ष की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
Indore Blackmail Case: इसी बीच दूसरे पक्ष राजेंद्र गुप्ता ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर सूरज रजक के खिलाफ गाली-गलौज से संबंधित मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद सवाल उठने लगे कि पहले शिकायत देने वाले व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि उसी के खिलाफ पहले एफआईआर दर्ज कर ली गई।
सूरज रजक ने लगाए गंभीर आरोप
Indore Blackmail Case: सूरज रजक का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले ब्लैकमेलिंग, मानहानि और 10 लाख रुपये की कथित मांग की शिकायत पुलिस से की थी, लेकिन उनकी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। उनका दावा है कि उन्होंने किसी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया और बातचीत सामान्य एवं विनम्र तरीके से हुई थी।
उनके अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने केवल यह पूछा था कि उनके खिलाफ प्रसारित किए गए संदेश गलत क्यों चलाए जा रहे हैं। इसके बाद उनसे कथित रूप से संदेश हटाने के बदले क्या कर सकते हैं, यह पूछा गया, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार की लेन-देन से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि इसके बाद उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी गई।
RTI एक्टिविस्ट पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप
सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र गुप्ता पर पहले भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वे आरटीआई के माध्यम से अधिकारियों और अन्य लोगों के मामलों की जानकारी जुटाकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और राजेंद्र गुप्ता की ओर से इन दावों पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
Indore Blackmail Case: पूरा मामला अब पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवालों के घेरे में है। चर्चा इस बात की हो रही है कि ब्लैकमेलिंग और कथित 10 लाख रुपये की रंगदारी की शिकायत पहले दर्ज होने के बावजूद उस पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत पर अपेक्षाकृत तेजी से एफआईआर दर्ज कर ली गई। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।







