कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! घटी एक्सपोर्ट ड्यूटी, नई दरें 1 जून से होंगी लागू

Rahul Goshwami

Petrol Diesel Export Duty Cut: पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कमी की घोषणा की है। पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती संबंधी अधिसूचना 30 मई को जारी की गई है और नई दरें 1 जून 2026 से लागू होंगी।

पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क में 1.50 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं डीजल पर 13.50 रुपए प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 9.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है।सरकार का मानना है कि इस कदम से तेल कंपनियों को राहत मिलेगी और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती का फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने वैश्विक बाजार की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया है ताकि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बना रहे।इससे पहले भी मई महीने में सरकार एक्सपोर्ट ड्यूटी की दरों में संशोधन कर चुकी है।
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क्या पेट्रोल-डीजल सस्ते होंगे?
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम लोगों को राहत मिलेगी? फिलहाल 31 मई को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।दिल्ली में पेट्रोल लगभग 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। हालांकि भविष्य में वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर स्थिति बदल सकती है।

मई में बढ़े थे ईंधन के दाम
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती के बावजूद हाल के महीनों में उपभोक्ताओं पर महंगे ईंधन का असर देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के अनुसार मई महीने के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।इस वजह से परिवहन लागत और घरेलू खर्चों पर भी प्रभाव पड़ा है।

कई शहरों में 110 रुपए के पार पहुंचा पेट्रोल
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती की चर्चा के बीच देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें अभी भी काफी ऊंची बनी हुई हैं। कुछ महानगरों में पेट्रोल 110 रुपए प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ी और ईंधन कीमतों पर दबाव बना।

एक्सपोर्ट ड्यूटी क्या होती है?
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी क्या होती है। यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है, जो किसी उत्पाद को विदेश भेजने पर लगाया जाता है।जब कोई कंपनी देश में तैयार उत्पाद का निर्यात करती है, तो उसे सरकार द्वारा तय शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।

सरकार एक्सपोर्ट ड्यूटी क्यों लगाती है?
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती के संदर्भ में विशेषज्ञ बताते हैं कि सरकार घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी का इस्तेमाल करती है।जब किसी वस्तु की घरेलू मांग बढ़ जाती है या कमी की आशंका होती है, तब सरकार शुल्क बढ़ाकर कंपनियों को देश के भीतर बिक्री के लिए प्रोत्साहित करती है। वहीं जरूरत पड़ने पर शुल्क घटाकर उद्योगों को राहत भी दी जाती है।

आगे क्या रहेगा असर?
पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी कटौती का वास्तविक असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और वैश्विक हालात स्थिर होते हैं, तो ईंधन बाजार में कुछ राहत की संभावना बन सकती है। हालांकि खुदरा कीमतों पर अंतिम असर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगा।

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