रायगढ़। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अब रायगढ़ पुलिस सड़क दुर्घटनाओं, आपदाओं और अचानक आने वाले हार्ट अटैक (हृदयाघात) जैसी गंभीर आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों की जान बचाने के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (प्रथम सहायक) की भूमिका निभाएगी। इसी उद्देश्य के साथ स्वर्गीय श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के तत्वावधान में ऑल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, रायगढ़ द्वारा रविवार (24 मई 2026) को मेडिकल कॉलेज परिसर में पुलिसकर्मियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण एकदिवसीय ‘सी.पी.आर. (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय पुलिस बल को तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे किसी भी आपदा या आपातकाल में पीड़ित व्यक्ति को चिकित्सा सहायता मिलने से पहले का ‘गोल्डन ऑवर’ (कीमती समय) बर्बाद होने से बचा सकें।
पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और वीडियो डेमो के जरिए डॉक्टरों ने सिखाए वैज्ञानिक तरीके
प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. गजेंद्र ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों व जवानों को आधुनिक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और लाइव वीडियो डेमो के माध्यम से सीपीआर की आवश्यकता, उसकी सही टाइमिंग और चिकित्सीय महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।
Tags और डॉक्टरों के तकनीकी प्रस्तुतीकरण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
-
रक्त संचार को पुनः सक्रिय करना: किसी भी सड़क दुर्घटना, आगजनी, डूबने, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा या अचानक आए गंभीर कार्डियक अरेस्ट के कारण यदि किसी व्यक्ति का ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) पूरी तरह प्रभावित हो जाए, वह अचेत (मूर्छित) हो और शरीर में कोई हलचल या प्रतिक्रिया न हो रही हो, तो सही वैज्ञानिक तरीके से छाती को दबाकर (चेस्ट कंप्रेशन) और कृत्रिम सांस देकर उसके दिल और दिमाग को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है।

-
पहला सुरक्षात्मक कदम: ऐसी स्थिति में सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को दुर्घटना वाले स्थान से हटाकर किसी सुरक्षित और समतल स्थान पर ले जाएं। उसकी नब्ज और सांस की प्रतिक्रिया तुरंत चेक करें।
-
आपातकालीन अलर्ट: स्थिति गंभीर होने पर बिना एक पल गंवाए तत्काल आपातकालीन चिकित्सा हेल्पलाइन डायल 108 और पुलिस सहायता नंबर 112 पर कॉल कर घटना की सटीक जानकारी दें और एम्बुलेंस बुलवाएं। जब तक विशेषज्ञ मेडिकल टीम मौके पर नहीं पहुंचती, तब तक लगातार सही गति से सीपीआर देकर पीड़ित व्यक्ति की सांसों को टूटने से बचाया जा सकता है।
थ्योरी के बाद प्रैक्टिकल: पुलिस जवानों ने डमी पर किया हाथ साफ
इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रही। डॉक्टरों की टीम ने पहले दुर्घटनाओं से जुड़े वास्तविक वीडियो के माध्यम से सीपीआर देने की पूरी लाइव क्रोनोलॉजी दिखाई। इसके बाद थियेटर में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों ने स्वयं आगे आकर, डॉक्टरों की सीधी निगरानी में, एक-एक कर डमी (मानव पुतले) पर सीपीआर देने का गहन प्रायोगिक अभ्यास (प्रैक्टिकल) किया। डॉक्टरों ने जवानों को हथेली की सही पोजीशन, दबाव की गहराई और प्रति मिनट दी जाने वाली कंप्रेशन की संख्या जैसी बारीकियों को व्यावहारिक रूप से सुधारा।
डीएसपी सुशांतो बनर्जी ने जताया आभार, कार्यशाला में 100 जवान रहे मौजूद
प्रशिक्षण सत्र के समापन पर रायगढ़ के उपपुलिस अधीक्षक (DSP) श्री सुशांतो बनर्जी ने इस बेहद उपयोगी और समसामयिक आयोजन के लिए ऑल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉक्टर प्रभात पटेल और उनकी पूरी विशेषज्ञ मेडिकल टीम के प्रति जिला पुलिस प्रशासन की ओर से आभार व्यक्त किया। डीएसपी बनर्जी ने कहा कि फील्ड में तैनात रहने के कारण पुलिसकर्मी ही सबसे पहले दुर्घटना स्थलों पर पहुंचते हैं, ऐसे में यह हुनर कई मासूमों की जिंदगी बचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
इस गरिमामयी और ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीएसपी सुशांतो बनर्जी, रक्षित निरीक्षक (RI) अमित सिंह सहित जिले के विभिन्न थानों, चौकियों और पुलिस लाइन से आए लगभग 100 से अधिक अधिकारी व जवानों ने पूरी मुस्तैदी के साथ भाग लिया और इस विधा को आत्मसात किया।









