Operation Aghaat: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों और नशे के सौदागरों के खिलाफ जिला पुलिस ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन और मार्गदर्शन में चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन आघात’ के तहत थाना लैलूंगा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 1.295 किलोग्राम अवैध गांजे के साथ एक आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
कुंजारा कॉलेज के पास नाकाबंदी कर पुलिस ने दबोचा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लैलूंगा पुलिस को मुखबिर के जरिए एक सटीक सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम नवीन कुंजारा क्षेत्र में एक व्यक्ति अवैध रूप से गांजे की बिक्री और परिवहन करने के उद्देश्य से आने वाला है। सूचना मिलते ही लैलूंगा थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुंजारा कॉलेज के पास घेराबंदी कर नाकाबंदी की।
नाकाबंदी के दौरान मुखबिर के बताए हुलिये के मुताबिक एक संदिग्ध व्यक्ति हाथ में थैला लेकर नवीन कुंजारा बस्ती की ओर आता दिखाई दिया। कॉलेज के पास तैनात पुलिस टीम को सामने देखकर वह सकपका गया और रास्ता बदलकर भागने का प्रयास करने लगा। मुस्तैद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे मौके पर ही दबोच लिया। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम रूपसिंह सिदार (पिता स्वर्गीय बुढन साय सिदार, उम्र 65 वर्ष), निवासी नवीन कुंजारा, थाना लैलूंगा बताया।
₹64,750 का गांजा जब्त, एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई
पुलिस टीम द्वारा गवाहों की उपस्थिति में संदेही रूपसिंह सिदार की विधिवत तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद थैले से 1.295 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 64,750 रुपये आंकी गई है। पुलिस ने जप्ती पत्रक तैयार कर गांजे को अपने कब्जे में ले लिया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने कबूल किया कि वह उक्त गांजे को क्षेत्र में ऊंचे दामों पर बेचने के उद्देश्य से लेकर जा रहा था। आरोपी रूपसिंह सिदार के खिलाफ थाना लैलूंगा में धारा 20(बी) एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक औपचारिकताएं पूरी की गईं, जिसके बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इस पूरी सराहनीय कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव, प्रधान आरक्षक बृज किशोर गिरी, प्रधान आरक्षक देव प्रसाद राठिया और आरक्षक शशि भूषण उरांव की मुख्य भूमिका रही।









