Gharghoda School Dress: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़: नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से ठीक पहले घरघोड़ा क्षेत्र में स्कूल ड्रेस की व्यवस्था को लेकर अभिभावकों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। सबसे बड़ा मुद्दा यह सामने आ रहा है कि क्या घरघोड़ा के सभी स्कूलों की यूनिफॉर्म खुले बाजार में आसानी से उपलब्ध है? इसके विपरीत, क्या कुछ विशेष दुकानों तक ही इसकी पूरी व्यवस्था को जानबूझकर सीमित कर दिया गया है? स्कूल खुलने से पहले ही इस विषय को लेकर स्थानीय बाजारों में चर्चाओं का माहौल बेहद गर्म हो चुका है।
अभिभावकों के सामने सीमित विकल्प
अभिभावकों का साफ तौर पर कहना है कि कई बार स्कूलों की ओर से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ खास दुकानों का नाम बताया जाता है। प्रबंधन द्वारा पालकों को उन्हीं तय दुकानों से ही ड्रेस खरीदने की सलाह दी जाती है। इस कारण से पालकों के सामने बाजार में खरीदारी के विकल्प बेहद सीमित हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, उन्हें मनमानी कीमत और कपड़ों की गुणवत्ता को लेकर भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
बजट और गुणवत्ता को लेकर असमंजस
इसके अलावा कई पालकों का मानना है कि यदि ड्रेस का कपड़ा, रंग और पैटर्न पहले से निर्धारित है, तो वह शहर की किसी भी दुकान पर उपलब्ध होना चाहिए। ऐसा होने से लोग अपनी सुविधा और व्यक्तिगत बजट के अनुसार स्वतंत्र रूप से खरीदारी कर सकेंगे। हालाँकि, कुछ लोगों का तर्क यह भी है कि विशेष लोगो, मोनोग्राम या विशिष्ट डिजाइन वाली यूनिफॉर्म होने के कारण ही चुनिंदा दुकानों की व्यवस्था बनाई जाती है।
शिक्षा विभाग के नियमों पर टिकी नजर
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी स्कूल द्वारा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से ही खरीदारी करने के लिए बाध्य किया जाता है, तो यह पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के कड़े नियम और दिशा-निर्देश बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अब जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि क्या शिक्षा विभाग इस पूरी व्यवस्था पर जमीनी स्तर पर निगरानी रख रहा है? अंततः, पालकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के लिए प्रशासन को इस पर स्थिति जल्द स्पष्ट करनी होगी।









