New Labour Code/नई दिल्ली: देश में आज से नए श्रम कानून लागू हो गए हैं, जिन्हें भारत के लेबर सिस्टम में अब तक का सबसे व्यापक और ऐतिहासिक सुधार भी माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है, जिनका उद्देश्य मजदूरों को समय पर वेतन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर कार्य परिस्थितियों जैसी बुनियादी गारंटियां देना है। सरकार का दावा है कि इन कानूनों से देश के 40 करोड़ से अधिक वर्कर्स के जीवन पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
समय पर न्यूनतम वेतन की गारंटी
नई लेबर कोड का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान है—हर वर्कर को समय पर न्यूनतम वेतन मिलना। सरकार ने कहा है कि वेतन में देरी, मनमानी कटौती या शोषण जैसी स्थितियों पर अब सख्त रोक लगेगी। कंपनियों को तय समयसीमा में सैलरी देना अनिवार्य किया गया है और इसका पालन न करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
हर युवा को नियुक्ति पत्र अनिवार्य
New Labour Code अब किसी भी कर्मचारी को नियुक्त करते ही कंपनी को उसे Appointment Letter देना होगा। यह कदम खासकर उन युवाओं के लिए राहत है जिन्हें जॉइनिंग के समय स्पष्ट शर्तें नहीं मिलती थीं। नए नियम से नौकरी की शर्तें, वेतन, समय और जिम्मेदारियां साफ तौर पर दर्ज होंगी, जिससे नौकरी सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
महिलाओं के लिए Equal Pay का स्पष्ट नियम
नई संहिता में महिलाओं को समान कार्य के बदले समान वेतन देने का सख्त प्रावधान है। सरकार के अनुसार, इससे जेंडर आधारित वेतन असमानता पर अंकुश लगेगा और महिलाओं को सभी स्तरों पर बराबर अवसर मिलेंगे। कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए कई अतिरिक्त नियम भी जोड़े गए हैं।
40 करोड़ वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी दायरे में
New Labour Code इन कानूनों के लागू होने के साथ ही देश की आधे से ज्यादा वर्कफोर्स पहली बार सोशल सिक्योरिटी के बड़े नेटवर्क से जुड़ जाएगी। इसमें EPF, ESI, ग्रेच्युटी, बीमा और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे भारत का लेबर स्टैंडर्ड वैश्विक मानकों के बराबर होगा।
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल बाद ग्रेच्युटी
फिक्स टर्म एम्प्लॉयीज़ यानी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को अब सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी का अधिकार मिलेगा। पहले यह पांच साल की निरंतर सेवा के बाद ही मिलता था। यह बदलाव उन लाखों वर्कर्स के लिए राहत है जो कम अवधि वाले कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं।
40 वर्ष से ऊपर के कर्मचारियों के लिए सालाना फ्री हेल्थ चेकअप
नई संहिता के तहत 40 वर्ष उम्र पार कर चुके हर कर्मचारी का साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया गया है। सरकार इसे लंबे समय में वर्कफोर्स की फिटनेस और उत्पादकता को बढ़ाने वाला कदम मान रही है।
ओवरटाइम पर डबल वेतन, जोखिम भरे सेक्टर्स में 100% सुरक्षा
अब ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों को डबल वेतन मिलेगा। इसके अलावा माइंस, केमिकल और कंस्ट्रक्शन जैसे जोखिमों वाले सेक्टर्स में पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मोदी सरकार का दावा—ग्लोबल स्टैंडर्ड वाला लेबर सिस्टम
सरकार का कहना है कि ये सुधार केवल कानूनी अपडेट नहीं, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी लेबर मार्केट बनाने का प्रयास हैं। सरकार इसे “वर्कर जस्टिस, डिग्निटी और सामाजिक सुरक्षा के नए युग की शुरुआत” बता रही है।













