बुरहानपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। नवजात शिशुओं के लिए जीवन रक्षक मानी जाने वाली ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) इन दिनों प्रदेश के कई जिलों में उपलब्ध नहीं है। बुरहानपुर सहित कई इलाकों में माता-पिता और परिजन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें हर जगह एक ही जवाब मिल रहा है— “वैक्सीन खत्म है।”
12–15 दिन में जरूरी, लेकिन वैक्सीन गायब
चिकित्सकीय मानकों के अनुसार जन्म के 12 से 15 दिनों के भीतर नवजात को पोलियो की पहली खुराक देना अनिवार्य होता है। लेकिन वैक्सीन की अनुपलब्धता के कारण कई बच्चों का समय पर टीकाकरण नहीं हो पा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
अभिभावकों की मजबूरी, पड़ोसी राज्यों का रुख
बुरहानपुर के परिजनों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।संदीप जाधव, एक अभिभावक ने बताया,“हमारे बच्चे का जन्म हुए 12 दिन हो गए हैं। डॉक्टर ने पोलियो वैक्सीन लगाने को कहा था, लेकिन किसी भी अस्पताल में वैक्सीन नहीं है। अब मजबूरी में महाराष्ट्र से वैक्सीन मंगाने की सोच रहे हैं।”
जिला अस्पताल ने भी मानी कमी
बुरहानपुर जिला अस्पताल में भी पोलियो वैक्सीन की अनुपलब्धता की पुष्टि की गई है।RMO भूपेन्द्र गौर ने बताया कि,“काफी समय से हमें पोलियो वैक्सीन नहीं मिली है। संभवतः पोलियो रोग की समाप्ति को देखते हुए ऊपर से सप्लाई नहीं की जा रही है।”
पोलियो मुक्त भारत, लेकिन लापरवाही खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि पोलियो मुक्त घोषित होने के बावजूद नियमित टीकाकरण और सतत निगरानी बेहद जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है, खासकर नवजात शिशुओं के लिए।
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जिम्मेदार कौन?
करोड़ों रुपये खर्च कर चलाए गए पोलियो उन्मूलन अभियान के बाद यदि वैक्सीन की आपूर्ति ठप हो जाए, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी। सवाल उठता है कि जब बच्चों की जान दांव पर है, तब सप्लाई चेन क्यों टूटी और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?









