M.P News: खंडवा में क्यों उबल पड़ा आदिवासी समाज? जानिए पूरा मामला

Khandwa Tribal Protest: खंडवा आदिवासी आंदोलन ने मंगलवार को पूरे जिले का माहौल बदल दिया। वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में हजारों आदिवासी जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। खंडवा आदिवासी आंदोलन के दौरान कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ अन्याय हुआ है और अब वे न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

खंडवा आदिवासी आंदोलन की शुरुआत गुड़ी रेंज के आमाखजूरी गांव में हुई कार्रवाई के विरोध से हुई। आदिवासी समाज का कहना है कि वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर बिना पहले से सूचना दिए बारिश के दौरान कई घरों पर बुलडोजर चला दिया। उनका आरोप है कि इस कार्रवाई से कई परिवारों को अचानक बेघर होना पड़ा और उन्हें अपनी बात रखने का भी मौका नहीं मिला।ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले नोटिस दिया जाता तो वे कानूनी तरीके से अपना पक्ष रख सकते थे। इसी नाराजगी ने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है।

हजारों लोग पहुंचे जिला मुख्यालय
खंडवा आदिवासी आंदोलन के तहत जिले के कई ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग खंडवा पहुंचे। पहले स्टेडियम ग्राउंड में सभा आयोजित की गई, जहां समाज के नेताओं ने लोगों को संबोधित किया। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी रैली के रूप में जिला मुख्यालय की ओर बढ़े।प्रदर्शन के दौरान वन विभाग, प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय किया गया है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम
खंडवा आदिवासी आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पहले से सतर्क दिखाई दिया। कलेक्ट्रेट के आसपास बैरिकेडिंग की गई और पूरे इलाके को सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील मानते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।अधिकारियों ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखी। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत भी की गई ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
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प्रदर्शनकारियों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
खंडवा आदिवासी आंदोलन के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि बिना नोटिस कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें उचित राहत और न्याय दिया जाए।समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि बारिश के मौसम में लोगों को बेघर करना मानवीय दृष्टि से भी सही नहीं है। उनका कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रशासन ने दिया जांच का भरोसा
खंडवा आदिवासी आंदोलन के बीच प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।हालांकि आदिवासी समाज ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले पर प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।

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