PWD Department Scame: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित फर्जी भुगतान का मामला गूंजा। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि बिलासपुर जिले में एक ही सरकारी कार्यक्रम के नाम पर दो अलग-अलग बिल बनाकर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। इस पर लोक निर्माण मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
PWD Department Scame: प्रश्नकाल के दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव ने दिसंबर 2023 से 16 जून 2026 तक बिलासपुर जिले में शासकीय कार्यक्रमों के लिए टेंट, स्टेज, कुर्सी, लाइट और साउंड व्यवस्था पर हुए खर्च का विवरण मांगा। उन्होंने यह भी पूछा कि किन-किन फर्मों और एजेंसियों को कितना भुगतान किया गया और कितना भुगतान लंबित है।
मंत्री अरुण साव ने सदन में बताया कि सभी भुगतान सत्यापन (वेरिफिकेशन) के बाद किए गए हैं और विभाग के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
हालांकि, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन में दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि 12 दिसंबर 2024 को तखतपुर में मुख्यमंत्री का केवल एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था, लेकिन विभाग ने उसी दिन दो अलग-अलग कार्यक्रम दर्शाकर करीब 48 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
विधायक के अनुसार, एक कार्यक्रम के लिए 24 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि उसी दिन पॉलिटेक्निक कॉलेज में मुख्यमंत्री के नाम से एक और कार्यक्रम दिखाकर 24 लाख रुपये का अलग बिल भी पास कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरा कार्यक्रम हुआ ही नहीं, तो उसका भुगतान किस आधार पर किया गया।
PWD Department Scame: अटल श्रीवास्तव ने सदन में अन्य खर्चों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बिल्हा विधानसभा के रहंगी में आयोजित कृषक सम्मेलन में टेंट और अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 13 लाख रुपये खर्च होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे बड़े सरकारी समारोहों में इससे काफी कम खर्च होता है, ऐसे में एक सम्मेलन पर इतना खर्च संदेह पैदा करता है।
PWD Department Scame: उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोलकाता-दिल्ली विमान सेवा के वर्चुअल शुभारंभ कार्यक्रम में भी टेंट और कुर्सियों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया।
PWD Department Scame: मामले पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।







