MP-CG Medical Store Strike: देशभर में आज दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित नजर आ रहा है। ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हजारों मेडिकल स्टोर बंद रखे गए हैं। इस बंद का असर सबसे ज्यादा आम मरीजों और रोजाना दवाओं पर निर्भर लोगों पर देखने को मिल सकता है।
मध्यप्रदेश में 41 हजार से ज्यादा मेडिकल दुकानें बंद
मध्यप्रदेश में करीब 41 हजार मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल में शामिल हैं। राजधानी भोपाल में ही लगभग 6 हजार दवा दुकानें बंद रहने की जानकारी सामने आई है। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री कर रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ सकती है।व्यापारियों का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट देकर छोटे मेडिकल स्टोर्स का कारोबार खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि दवा कारोबारी अब खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
छत्तीसगढ़ में 18 हजार मेडिकल स्टोर पर ताला
छत्तीसगढ़ में भी मेडिकल कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा। प्रदेशभर में करीब 18 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद रखे गए हैं। रायपुर में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल दुकानों के बंद रहने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स देकर स्थानीय बाजार को कमजोर कर रही हैं। इससे छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
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मरीजों की बढ़ी चिंता, अस्पतालों में बढ़ सकता है दबाव
मेडिकल स्टोर बंद होने का सबसे ज्यादा असर हार्ट, शुगर, ब्लड प्रेशर और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ सकता है। कई लोग सुबह से खुली मेडिकल दुकानों की तलाश करते नजर आए।हालांकि प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों और अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर्स को खुले रखने के निर्देश दिए हैं ताकि इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित न हों।
ऑनलाइन फार्मेसी पर क्यों उठ रहे सवाल?
दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली, एक्सपायरी और गलत दवाओं के बिकने का खतरा बढ़ गया है। उनका दावा है कि कई बार बिना डॉक्टर की सलाह के भी दवाएं लोगों तक पहुंच रही हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं।व्यापारिक संगठनों का मानना है कि ऑनलाइन कंपनियों की अनियंत्रित छूट स्थानीय व्यापार और पारंपरिक मेडिकल व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बन रही है।
सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड पर
मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने सरकारी जनऔषधि केंद्रों, अस्पतालों और इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।लोगों से अपील की गई है कि घबराकर दवाओं का जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें और आवश्यकता पड़ने पर सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करें।
सवालों में समझिए पूरा मामला
Q1. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मेडिकल स्टोर क्यों बंद हैं?
ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में केमिस्ट संगठनों ने हड़ताल की है।
Q2. क्या सभी मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे?
ज्यादातर निजी मेडिकल स्टोर्स बंद हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों और जनऔषधि केंद्रों की सेवाएं जारी रहेंगी।
Q3. मरीजों को दवाएं कहां मिलेंगी?
सरकारी अस्पताल, जनऔषधि केंद्र और अस्पताल परिसर के मेडिकल स्टोर्स खुले रहेंगे।
Q4. सबसे ज्यादा परेशानी किन लोगों को हो सकती है?
हार्ट, शुगर, बीपी और रोजाना दवा लेने वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो सकती है।
Q5. केमिस्ट संगठनों की मुख्य मांग क्या है?
ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण, नकली दवाओं पर कार्रवाई और भारी डिस्काउंट रोकने की मांग की जा रही है।









