Mor Gaon Mor Pani Abhiyan MCB : मनेन्द्रगढ़/एमसीबी (09 फरवरी 2026): मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी योजना ‘मोर गांव मोर पानी’ आज छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में जल आत्मनिर्भरता का पर्याय बन रही है। एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम मुख्तियारपारा में वर्षों से बेकार पड़े एक स्टापडेम के पुनरुद्धार ने न केवल जल संकट को समाप्त किया है, बल्कि खेती और पशुपालन के जरिए ग्रामीणों के लिए समृद्धि के द्वार भी खोल दिए हैं।
समस्या से समाधान तक का सफर
ग्राम मुख्तियारपारा के स्थानीय नाले पर बना स्टापडेम लंबे समय से गाद (सिल्ट) जमा होने और जर्जर होने के कारण अनुपयोगी हो गया था। सर्दियों के बाद पानी रुकना बंद हो जाता था, जिससे ग्रामीणों को निस्तार और पशुओं के पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी। सिंचाई की सुविधा न होने से रबी की फसल लेना एक सपना बन गया था।
ग्राम सभा और मनरेगा का संगम
इस समस्या का समाधान ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत ग्राम सभा में निकला। ग्रामीणों के प्रस्ताव पर महात्मा गांधी नरेगा (MNREGA) के माध्यम से 4.95 लाख रुपये की स्वीकृति मिली। ग्राम पंचायत मुख्तियारपारा ने स्वयं निर्माण एजेंसी बनकर तकनीकी निगरानी में इस स्टापडेम की सिल्ट हटाई और भूमि सुधार का कार्य समय सीमा में पूर्ण किया।
खुशहाली के अंकुर: सब्जी उत्पादन और बढ़ता जलस्तर
जीर्णोद्धार के बाद स्टापडेम की जल धारण क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका लाभ ग्राम सलका और सिरौली के लगभग 45 परिवारों को मिल रहा है।
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कृषि में सुधार: लगभग 5 एकड़ से अधिक भूमि अब पूरी तरह सिंचित है। 8 से 10 परिवारों ने पहली बार रबी फसल के साथ बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन शुरू किया है।
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भू-जल स्तर: आसपास के कुओं और हैंडपंपों के जलस्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
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पशुपालन: अब गर्मियों में भी मवेशियों के लिए पानी की कोई कमी नहीं रहती।
सामुदायिक सहभागिता की जीत
यह सफलता की कहानी सिद्ध करती है कि जब सरकारी योजना और ग्राम सभा की इच्छाशक्ति एक साथ मिलती है, तो पुरानी और अनुपयोगी संरचनाएं भी टिकाऊ विकास का आधार बन जाती हैं। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान अब एमसीबी जिले के अन्य गांवों के लिए भी जल संरक्षण की एक प्रेरणादायी मिसाल बन गया है।











