Saturday, August 15, 2026
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Mental Cruelty : नौकरी न होने पर पति को ताना मारती थी पत्नी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 52 वर्षीय पति को दिया तलाक, क्यों है यह अहम फैसला?

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Mental Cruelty
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Mental Cruelty : बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर में तलाक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि बेरोजगार पति को ताने मारना और उसे अपमानित करना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) के अंतर्गत आता है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पति अनिल कुमार सोनमणि उर्फ अनिल स्वामी को तलाक की अनुमति दी।

Mental Cruelty : शादी के बाद जीवन सामान्य था, लेकिन—–

Mental Cruelty : मामला भिलाई निवासी अनिल कुमार का है, जिनकी शादी 26 दिसंबर 1996 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद जीवन सामान्य था, लेकिन समय के साथ पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगे। इस दौरान दंपती के दो बच्चे हुए – बेटी 19 वर्ष और बेटा 16 वर्ष। पति ने अपनी पत्नी को उच्च शिक्षा प्राप्त करवाई और पीएचडी के बाद प्रिंसिपल बनने में मदद की। इसके बाद पत्नी के व्यवहार में बदलाव आया और वह छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगी।

Mental Cruelty : बेरोजगार पति पर ताने मारना शुरू कर दिया

Mental Cruelty : COVID-19 महामारी के दौरान कोर्ट बंद होने और पेशे से वकील पति की आय प्रभावित होने पर पत्नी ने बेरोजगार पति पर ताने मारना शुरू कर दिया। लगातार अपमान और मानसिक दबाव के कारण पति तनावग्रस्त हो गए। अगस्त 2020 में पत्नी अपनी बेटी के साथ बहन के पास चली गई और सितंबर 2020 में पत्र लिखकर पति और बेटे से सारे रिश्ते तोड़ने की घोषणा कर दी। पति ने कई बार उसे मनाने की कोशिश की, लेकिन पत्नी ने किसी भी प्रयास को असफल कर दिया।

Mental Cruelty : पति ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला दायर किया

 

Mental Cruelty : पति ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला दायर किया, जिसमें तर्क दिया कि पत्नी ने जानबूझकर वैवाहिक घर छोड़ा और मानसिक क्रूरता का व्यवहार किया। फैमिली कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में तलाक याचिका खारिज कर दी। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील की।

Mental Cruelty : पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं थी

Mental Cruelty : सुनवाई के दौरान पत्नी हाईकोर्ट में उपस्थित नहीं हुई। कोर्ट ने पति और गवाहों के बयानों, पत्नी द्वारा छोड़े गए पत्र और अन्य दस्तावेजों का अध्ययन किया। हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने बिना किसी वैध कारण के पति को छोड़ दिया और उसका व्यवहार मानसिक क्रूरता साबित करता है। साथ ही, दोनों के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं थी।

Mental Cruelty : मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं

Mental Cruelty : हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि भावनात्मक अपमान और ताने-तशाद भी इसके दायरे में आते हैं। फैसले के अनुसार, पति की तलाक की अर्जी मंजूर की जाती है, जिससे यह उदाहरण स्थापित होता है कि वैवाहिक जीवन में साथी का सम्मान और भावनात्मक सहयोग बेहद आवश्यक है और इसकी अनदेखी मानसिक क्रूरता के अंतर्गत मानी जा सकती है। यह फैसला भविष्य में लिंग-न्यूट्रल दृष्टिकोण और भावनात्मक कल्याण को मजबूत करेगा।

Mental Cruelty : क्यों अहम है यह फैसला?

Mental Cruelty : यह निर्णय बताता है कि:मानसिक क्रूरता सिर्फ शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक अपमान भी इसमें शामिल हैं। दालतों ने स्पष्ट किया कि साथी का सम्मान और भावनात्मक सहयोग वैवाहिक रिश्ते की बुनियादी शर्त है। यह फैसला आने वाले समय में लिंग-न्यूट्रल (Gender Neutral) दृष्टिकोण को और मजबूती देगा।

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