Wednesday, September 2, 2026
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Mauganj News: मऊगंज में ‘डिजिटल विद्रोह’ की आग! संतोष कोल की सोशल पोस्ट से पुलिस को धमकी — ‘गडरा कांड’ का हवाला देकर आदिवासी समुदाय में उभारा असंतोष”

CG CRIME
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Mauganj News: अभय मिश्रा/ मऊगंज : “मऊगंज से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर — जहां सोशल मीडिया एक बार फिर सियासी और सामाजिक विस्फोट का मंच बन गया है। भाजपा के पूर्व अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष संतोष कोल की पोस्टों ने पुलिस-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। गडरा हिंसा का जिक्र करते हुए कोल ने फेसबुक पर खुलेआम पुलिस को चुनौती दी है — और आदिवासी समाज को ‘लठ उठाने’ का आह्वान कर दिया है।”

 

Mauganj News: हनुमना थाना क्षेत्र से उठी इस सोशल मीडिया लहर ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। भाजपा के पूर्व महामंत्री और पार्षद प्रत्याशी संतोष कोल ने फेसबुक पर लगातार भड़काऊ पोस्ट डाले — जिनमें पुलिस को सीधी धमकी दी गई और आदिवासी समाज से हिंसक प्रतिक्रिया की अपील की गई।”
उनकी पोस्ट में लिखा गया — ‘पुलिस शराब पीकर सो रही थी, मैं घर में कैद रहा, मारने आए लोगों से बचाने कोई नहीं आया’, ‘क्या आदिवासी होना गुनाह है?’, और सबसे गंभीर बयान — ‘अब आदिवासी पुलिस वालों को चुन-चुन कर मारो’।”

 

Mauganj News: “एक पोस्ट में तो साफ लिखा — ‘अब लठमार शुरू होनी चाहिए, पुलिस स्टेशन तक नहीं पहुंचने देंगे’ — जिसे लेकर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।”पोस्टों में ‘गडरा कांड’ की बार-बार चर्चा की गई — वही घटना जिसमें एक एएसआई की हत्या हुई थी, तहसीलदार घायल हुए थे और पूरा गांव जल उठा था। तब हिंसा इतनी विकराल थी कि गांव के कई दलित और आदिवासी परिवारों को जान बचाकर पलायन करना पड़ा था।””उसी हिंसा में एक पिता ने अपनी दो बेटियों संग आत्महत्या कर ली थी। सैकड़ों गिरफ्तारियां हुई थीं, प्रशासन में बड़े स्तर पर तबादले हुए थे और डीजीपी तक को दौरा करना पड़ा था। आज भी गडरा गांव के कई घर खाली पड़े हैं।”

 

Mauganj News: “गडरा कांड में मारा गया अशोक कोल, संतोष कोल का समधी था — और उस हत्या का आरोप सनी द्विवेदी पर लगा था, जिसे बाद में भीड़ ने मार डाला। ऐसे में संतोष कोल की सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया को केवल जनसामान्य की भावना नहीं, बल्कि निजी प्रतिशोध भी माना जा रहा है।”
“संतोष कोल की सियासी पृष्ठभूमि भी कम विवादित नहीं रही। वे तीन बार पार्षद चुनाव लड़ चुके हैं, उनकी पत्नी वर्तमान में वार्ड 7 की पार्षद हैं। वे 2019 से 2024 तक भाजपा के महामंत्री रहे, लेकिन जुए के एक मामले में पार्टी ने उन्हें पद से हटा दिया था। बावजूद इसके, आदिवासी राजनीति में उनकी गहरी पकड़ अब भी कायम है।”

 

 

 

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