Thursday, September 10, 2026
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MP News: मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर बड़ा फैसला, आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

MP Promotion Reservation Case:  निशानेबाज न्यूज़ डेस्क-  मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसमें आरक्षण की तय 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए। कोर्ट की व्यवस्था के मुताबिक कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने से केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि आरक्षण से जुड़ा मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।हालांकि, पदोन्नति की प्रक्रिया में आरक्षण की संवैधानिक सीमा का पालन करना जरूरी होगा। यानी सरकार प्रमोशन की प्रक्रिया जारी रख सकती है, लेकिन आरक्षण का लाभ देते समय 50 प्रतिशत की सीमा से आगे नहीं जा सकेगी।

मुख्य सचिव को दी गई निगरानी की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण की निर्धारित सीमा का सख्ती से पालन हो।यह निर्देश ऐसे समय आया है जब मध्यप्रदेश में प्रमोशन और आरक्षण को लेकर कानूनी स्थिति लंबे समय से चर्चा में है। कोर्ट ने फिलहाल ऐसी व्यवस्था बनाए रखने को कहा है, जब तक संबंधित मामले और सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरबी राय तथा जरनैल सिंह से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता।इसका मतलब यह है कि फिलहाल प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं होगी। सरकार कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए विचार में ला सकती है, लेकिन आरक्षण की सीमा से जुड़े कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा।
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प्रमोशन के बाद पुराने पद पर भेजना बन सकता है बड़ी मुश्किल
सुनवाई के दौरान भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से भी अपनी दलीलें रखी गईं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट के सामने प्रमोशन से जुड़ी व्यावहारिक समस्या उठाई।उनका कहना था कि राज्य में लगातार कर्मचारियों को प्रमोशन दिए जा रहे हैं। ऐसे में यदि बाद में कानूनी स्थिति बदलती है या आरक्षण से जुड़ी व्यवस्था के कारण किसी प्रमोशन को प्रभावित करना पड़ता है, तो संबंधित कर्मचारी को दोबारा पुराने पद पर भेजना आसान नहीं होगा।उन्होंने आरबी राय मामले का हवाला देते हुए कहा कि कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय से विवाद होने के बावजूद प्रभावित कर्मचारियों को अब तक पुराने पद पर वापस नहीं भेजा गया है।

कर्मचारियों के लिए क्या है इस आदेश का मतलब?
हाईकोर्ट की मौजूदा व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी तरह रोकने का आदेश नहीं दिया गया है। कर्मचारी प्रमोशन के लिए विचार किए जा सकते हैं, लेकिन आरक्षण का इस्तेमाल तय सीमा के भीतर ही करना होगा।इससे एक तरफ पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुला रहता है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण की सीमा को लेकर सरकार की जिम्मेदारी भी तय हो जाती है।अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 दिसंबर 2026 को होगी। इस दौरान कोर्ट के सामने मामले से जुड़े आगे के कानूनी पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है।

सरकार की ओर से किसने रखा पक्ष?
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा। फिलहाल हाईकोर्ट की व्यवस्था के अनुसार प्रमोशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का पालन अनिवार्य रहेगा।आगे की स्थिति संबंधित मामलों में आने वाले न्यायिक फैसलों पर निर्भर करेगी। खासकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के बाद प्रमोशन और आरक्षण को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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