Bhopal GMC Intern Doctors Strike-निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल गांधी मेडिकल कॉलेज में हालात हर बीतते घंटे के साथ गंभीर होते जा रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर अड़े युवा डॉक्टरों का गुस्सा अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है। इस पूरी स्थिति के कारण भोपाल इंटर्न डॉक्टर हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।
आधी रात की वार्ता में क्या हुआ?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर खुद गांधी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां उन्होंने देर रात तक डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में लंबी बैठक की। हर किसी की नजर इस बात पर टिकी थी कि क्या कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच किसी भी बात पर सहमति नहीं बन सकी। बातचीत खत्म होने के बाद प्रशासन ने इसे सकारात्मक चर्चा बताया, लेकिन भोपाल इंटर्न डॉक्टर हड़ताल का यह गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
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आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन
यह आंदोलन अब सिर्फ इंटर्न डॉक्टरों तक सीमित नहीं रह गया है। इस लड़ाई में अब जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, मेडिकल टीचर्स और सीनियर रेजिडेंट्स भी खुलकर मैदान में आ चुके हैं। वरिष्ठ डॉक्टरों के समर्थन में आते ही अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। इमरजेंसी सेवाओं पर भी इसका असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इस एकजुटता ने भोपाल इंटर्न डॉक्टर हड़ताल को एक नया और आक्रामक मोड़ दे दिया है।
मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें
अस्पताल के मुख्य द्वार और ओपीडी काउंटर पर सुबह से ही लाचार मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ जमा है। कई मरीज ऐसे हैं जो गंभीर हालत में दूर के जिलों से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों के ओपीडी में न बैठने से हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। अगर समय रहते कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो भोपाल इंटर्न डॉक्टर हड़ताल आने वाले दिनों में आम जनता के लिए बेहद मुसीबत भरी साबित हो सकती है।






