Thursday, September 10, 2026
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Bijapur News: खौफ की आड़ में कागजों पर बन गईं सड़कें! बीजापुर में 24 सड़कों का जमीनी सच चौंकाने वाला, 91.60 करोड़ के बजट पर उठे सवाल

Bijapur News
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Bijapur News: बीजापुर/रायपुर। कभी नक्सल गतिविधियों के कारण जहां प्रशासन और सरकारी अमले की पहुंच बेहद मुश्किल मानी जाती थी, अब उन्हीं इलाकों में सड़क निर्माण से जुड़े पुराने काम सवालों के घेरे में हैं। नक्सल प्रभाव कम होने के बाद जब दूरदराज के क्षेत्रों में नई सड़कों की योजना तैयार की जा रही है, तब पुराने सड़क निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत सामने आने लगी है। एक पड़ताल में बीजापुर के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वीकृत 24 सड़कों के निर्माण और भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

बताया गया है कि इन 24 सड़कों के लिए करीब 91.60 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था। इनमें से लगभग 45 करोड़ रुपए का भुगतान ठेकेदारों को किए जाने की बात सामने आई है। पड़ताल के दौरान 18 सड़कों पर निर्माण संबंधी बोर्ड तक नहीं मिले। कुछ स्थानों पर सड़क पूरी तरह जमीन पर मौजूद नहीं मिली, जबकि कुछ जगह केवल मिट्टी और मुरम डालकर रास्ते को सड़क का स्वरूप दिए जाने का दावा किया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन सड़कों का निर्माण कागजों में पूरा बताया गया, उनका वास्तविक निर्माण आखिर कहां और कितना हुआ? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए दूरदराज के गांवों तक पहुंचकर इन सड़कों की स्थिति देखी गई।

वडेतुंगाली सड़क: 8 किलोमीटर की मंजूरी, करीब 4 किलोमीटर बाद रास्ता खत्म

वडेतुंगाली में 8 किलोमीटर सड़क का काम वर्ष 2018-19 में स्वीकृत हुआ था। इसके लिए धंगल बिल्डर्स को करीब 3.18 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया और लगभग 2.06 करोड़ रुपए जारी किए गए। जमीनी पड़ताल में सड़क का बोर्ड टूटा हुआ किनारे पड़ा मिला। करीब 3.9 किलोमीटर आगे जाने के बाद एक बड़ा रपटा आया, जिसके आगे वाहन से जाना संभव नहीं था।

स्थानीय सरपंच संतोष लेकाम के मुताबिक, गांव में मिट्टी का रास्ता पहले से मौजूद था। उनका दावा है कि स्वीकृत 8 किलोमीटर सड़क में करीब 4 किलोमीटर के बाद आगे निर्माण नहीं हुआ। शुरुआती हिस्से में भी बगल से मिट्टी निकालकर रास्ते पर डालने की बात सामने आई।

दुडुम रोड: 7 किलोमीटर की सड़क तलाशने में लगे दो दिन

दुडुम के लिए 7 किलोमीटर सड़क वर्ष 2018 में स्वीकृत की गई थी। हरबीर सिंह बदेशा एजेंसी को करीब 2.40 करोड़ रुपए का ठेका मिला था, जबकि 57 लाख रुपए भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जमीनी पड़ताल में इस सड़क को तलाशने में दो दिन लगने की बात कही गई। भैरमगढ़ हाईवे से बेलचर की ओर जाने वाली पगडंडी से आगे बढ़ने के बाद एक मिट्टी का रास्ता दिखाई दिया, लेकिन करीब आधा किलोमीटर बाद वह भी समाप्त हो गया। लगभग 3 किलोमीटर आगे इंद्रावती नदी आ गई। स्थानीय जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित सड़क का एक हिस्सा नदी के इस पार और दूसरा हिस्सा उस पार बनाया जाना था।

बिरयाभूमि-इदेर सड़क: रास्ता ही नहीं मिला, अलाइमेंट पर सवाल

बिरयाभूमि से इदेर तक 14 किलोमीटर सड़क का काम वर्ष 2018 में स्वीकृत हुआ था। श्रिंग कंस्ट्रक्शन को करीब 4.40 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया था, जबकि 24.65 लाख रुपए भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई है।

मौके पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने बिरयाभूमि से इदेर के लिए ऐसी सड़क बनने से इनकार किया। विभागीय जानकारी के मुताबिक सड़क का अलाइमेंट गलत हो गया था और इदेर की बजाय दलेर की दिशा में सड़क बनाई गई। हालांकि दलेर की ओर जाने वाले रास्ते पर भी करीब आधा किलोमीटर बाद रपटा आने और आगे रास्ता समाप्त होने की बात सामने आई। सड़क पर मुख्य रूप से मिट्टी और मुरम की परत दिखाई देने का दावा किया गया।

पिटेतुंगाली रोड: एक ही हिस्से को दो सड़कों में दिखाने का आरोप

पिटेतुंगाली रोड की लंबाई 13 किलोमीटर बताई गई है। वर्ष 2018-19 में धंगल बिल्डर्स को करीब 3.78 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया, जिसमें 1.45 करोड़ रुपए भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जमीनी पड़ताल के मुताबिक निर्माण स्थल पर स्वीकृत राशि से संबंधित बोर्ड नहीं मिला। सड़क पर मिट्टी और मुरम की परत दिखाई दी। करीब ढाई किलोमीटर बाद रास्ता खराब मिला और लगभग पांच किलोमीटर आगे यह सड़क बड़े तोंगल जाने वाली सड़क से जुड़ गई। आरोप है कि दोनों सड़कों का करीब आधा किलोमीटर हिस्सा एक ही है। ऐसे में एक ही हिस्से को दो अलग-अलग सड़क परियोजनाओं में दिखाकर भुगतान किए जाने के सवाल उठ रहे हैं। आगे करीब एक किलोमीटर बाद रास्ता पगडंडी में बदलने की बात भी सामने आई।

पुल-पुलियों का निर्माण भी सवालों के घेरे में

इन सड़क परियोजनाओं में प्रत्येक सड़क पर औसतन 5 से 6 पुल-पुलियों का निर्माण प्रस्तावित होने की जानकारी है। 1.5 मीटर की पुलिया के लिए करीब 6 से 6.5 लाख रुपए, 3 मीटर की पुलिया के लिए करीब 8 लाख रुपए और 6 मीटर की पुलिया के लिए करीब 19 लाख रुपए तक का प्रावधान बताया गया है।

पड़ताल में कई स्थानों पर प्रस्तावित पुल-पुलियों का निर्माण नहीं होने का दावा किया गया है। नक्सल प्रभाव के कारण निर्माण कार्य में बाधा होने की बात सामने आती रही, लेकिन सवाल यह है कि यदि निर्माण नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया गया और परियोजनाओं को पूर्ण कैसे दर्शाया गया?

जेसीबी से मिट्टी डालकर सड़क बनाने का आरोप

पीएमजीएसवाई के तहत एक किलोमीटर सड़क के निर्माण के लिए औसतन 30 से 35 लाख रुपए तक की राशि का प्रावधान बताया गया है। इसमें मिट्टी और मुरम के साथ करीब छह इंच मोटी गिट्टी की परत बिछाने जैसी निर्माण प्रक्रिया शामिल होती है। लेकिन पड़ताल में कई सड़कों पर गिट्टी की निर्धारित परत नहीं मिलने का दावा किया गया है।

Bijapur News: आरोप है कि कुछ स्थानों पर जेसीबी के जरिए सड़क के आसपास के खेतों या जमीन से मिट्टी निकालकर रास्ते पर डाल दी गई और उसे चौड़ा कर दिया गया। कहीं-कहीं मुरम की पतली परत बिछाई गई। सड़क निर्माण से जुड़े सुमित सिंह के मुताबिक, इस तरह के काम में वास्तविक खर्च करीब 3 से 5 लाख रुपए तक हो सकता है।

अधिकारी ने कार्रवाई का दिया भरोसा

Bijapur News: पीएमजीएसवाई के ईएनसी केके कटारे के मुताबिक, बस्तर में नई सड़कें बनाने के दौरान ऐसी कुछ सड़कें सामने आ रही हैं, जिनका निर्माण नहीं हुआ लेकिन उनका भुगतान कर दिया गया और पोर्टल पर उन्हें पूर्ण दर्शाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Bijapur News: अब बड़ा सवाल यही है कि वर्षों पहले स्वीकृत इन सड़क परियोजनाओं की निगरानी किस स्तर पर हुई, निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसने की और अधूरे या कथित रूप से गायब निर्माण के बावजूद भुगतान कैसे जारी हुआ। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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