Chhattisgarh Liquor Scam Update : रायपुर: छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित ₹2,800 करोड़ (संशोधित अनुमान ₹2,883 करोड़) के शराब घोटाले में ईडी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित संपत्तियों पर शिकंजा कसा है।
कुर्क की गई संपत्तियों का विवरण
ईडी द्वारा जारी बयान के अनुसार, कुल 275 संपत्तियां कुर्क की गई हैं:
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अचल संपत्तियां (78): इनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और विशाल कृषि भूमि शामिल है। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य लगभग ₹21.64 करोड़ है।
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चल संपत्तियां (197): इसमें ₹16.56 करोड़ मूल्य की सावधि जमा (FD), विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां और शेयर बाजार (म्यूचुअल फंड) में किया गया निवेश शामिल है।
घोटाले का मुख्य किरदार: निरंजन दास
जांच में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास ने इस पूरे सिंडिकेट को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी:
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अवैध कमाई: ईडी के अनुसार, निरंजन दास ने अकेले ₹18 करोड़ से अधिक की ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) अर्जित की।
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मासिक रिश्वत: घोटाले को सुचारू रूप से चलाने के बदले उन्हें कथित तौर पर ₹50 लाख प्रति माह की रिश्वत दी जाती थी।
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सिंडिकेट का मास्टरमाइंड: उन्होंने अरुण पति त्रिपाठी (MD, CSMCL) के साथ मिलकर एक समानांतर आबकारी प्रणाली चलाई, जिसमें सरकारी खजाने को दरकिनार कर अवैध शराब बेची गई।
तीन प्रमुख डिस्टिलरीज पर भी गाज
इस कार्रवाई के साथ ही ईडी ने छत्तीसगढ़ की तीन बड़ी डिस्टिलरीज— छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड (CDL), भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (BWMPL) और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड (WDPL) की भी ₹68.16 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। इन कंपनियों पर कच्ची शराब की अवैध सप्लाई (पार्ट-B) का आरोप है।









