इंदौर हनी ट्रैप केस में एक बार फिर बड़ा मोड़ सामने आया है। श्वेता जैन के बाद अब पुलिस ने सागर से रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी को इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह पहले बीजेपी प्रकोष्ठ से भी जुड़ी रही है। गिरफ्तारी के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच डिजिटल सबूतों और वीडियो रिकॉर्ड की जांच में जुट गई है।
श्वेता जैन ब्लैकमेलिंग मामला उस वक्त फिर सुर्खियों में आया जब इंदौर के शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कारोबारी का आरोप है कि निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे करोड़ों रुपए मांगने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर स्तर पर जांच शुरू की गई।
इंदौर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई
इंदौर क्राइम ब्रांच जांच के तहत भोपाल स्थित मीनाल रेजीडेंसी से श्वेता जैन को हिरासत में लिया गया। वहीं पुलिस ने शराब तस्करी से जुड़ी अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और इंटेलिजेंस शाखा के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा से भी पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल लिंक तलाश रही हैं।
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कारोबारी को साझेदारी के नाम पर फंसाने का आरोप
MP ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की जांच में सामने आया है कि कारोबारी हितेंद्र सिंह की मुलाकात कुछ साल पहले अलका दीक्षित से हुई थी। बाद में लाखन चौधरी ने खुद को बड़ा निवेशक बताकर खंडवा, धार और देवास समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी का प्रस्ताव दिया। कारोबारी के इनकार के बाद कथित रूप से दबाव और धमकियों का दौर शुरू हुआ।
सुपर कॉरिडोर पर मारपीट का दावा
इंदौर कारोबारी विवाद में पीड़ित कारोबारी ने आरोप लगाया कि करीब 20 दिन पहले सुपर कॉरिडोर इलाके में उसके साथ मारपीट की गई। आरोप है कि अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित और लाखन चौधरी ने 50 प्रतिशत साझेदारी की मांग करते हुए दबाव बनाया। इनकार करने पर निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।
हेड कॉन्स्टेबल की भूमिका पर भी सवाल
MP पुलिस जांच में इंटेलिजेंस शाखा के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस को कॉल रिकॉर्ड और चैटिंग में कई अहम सुराग मिले हैं। जांच के दौरान विनोद शर्मा के घर से मोबाइल, लैपटॉप और कारोबारी के कथित निजी फोटो-वीडियो बरामद किए गए हैं।
2019 के बहुचर्चित हनी ट्रैप केस से जुड़ रहे तार
मध्यप्रदेश हनी ट्रैप मामला एक बार फिर 2019 के चर्चित केस की याद दिला रहा है। उस समय नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को कथित तौर पर जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ था। जांच एजेंसियों ने श्वेता विजय जैन को उस केस का कथित मास्टरमाइंड बताया था।
डिजिटल सबूतों की जांच तेज
हनी ट्रैप डिजिटल जांच के तहत पुलिस अब वीडियो, चैट रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक कई नए नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ब्लैकमेलिंग नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
MP राजनीतिक विवाद के बीच आरोपी के बीजेपी प्रकोष्ठ से जुड़े होने की चर्चा ने राजनीतिक माहौल भी गर्म कर दिया है। हालांकि अब तक किसी राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।









