इंदौर : इंदौर हाईकोर्ट में आज भागीरथपुरा दूषित पानी मामले की अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है, और पूरे प्रदेश में चिंता और गुस्सा देखने को मिल रहा है। सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछली बार कोर्ट ने प्रशासन के तर्कों पर गंभीर सवाल उठाए थे।
पिछली सुनवाई में प्रशासन पर कड़ी फटकार
20 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि केवल एक पुलिस चौकी के शौचालय से पानी इतनी मात्रा में दूषित होकर 28 लोगों की जान ले सकता है, यह संभव नहीं लगता। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए थे कि इतने बड़े हादसे के पीछे गहरी लापरवाही हो सकती है। अदालत ने जल आपूर्ति, पाइपलाइन की स्थिति, रखरखाव और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।
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स्थानीय लोगों की नाराजगी और शिकायतें
भागीरथपुरा के रहवासी अब भी गुस्सा और डर दोनों महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद दूषित पानी की समस्या को नजरअंदाज किया गया, और नतीजा यह बड़ा हादसा बनकर सामने आया। पीड़ित परिवारों को अब तक सही जानकारी या ठोस कार्रवाई नहीं दी गई।
कोर्ट से क्या उम्मीदें हैं
आज की सुनवाई में हाईकोर्ट प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट और ठोस जवाब मांग सकता है। साथ ही मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की संभावना है।
भागीरथपुरा मामला अब केवल स्थानीय समस्या नहीं
यह मामला अब पूरे शहर की जल व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुका है। हाईकोर्ट की आज की सुनवाई से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद है, और पूरे प्रदेश की निगाहें इस गंभीर मामले पर टिकी हुई हैं।











