निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : देश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सात राज्यों के राज्यपालों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों की नई नियुक्तियां की हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली, लद्दाख, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और नगालैंड समेत कई क्षेत्रों में नए चेहरे जिम्मेदारी संभालेंगे।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक इस फेरबदल को प्रशासनिक मजबूती और बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दिल्ली और लद्दाख के उपराज्यपाल बदले
नए आदेश के तहत भारत के पूर्व अमेरिकी राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, मौजूदा दिल्ली उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दिल्ली जैसे संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश में संधू की नियुक्ति केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है।
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बिहार को मिला नया राज्यपाल
भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। हसनैन रणनीतिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं और उन्होंने कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। बिहार जैसे बड़े और जटिल राज्य में उनकी नियुक्ति प्रशासनिक अनुशासन और सुरक्षा दृष्टिकोण को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
इन राज्यों में भी बदले गए राज्यपाल
राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश के अनुसार कई अन्य राज्यों में भी नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।
नए राज्यपाल इस प्रकार हैं:
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पश्चिम बंगाल – आर.एन. रवि
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महाराष्ट्र – जिष्णु देव वर्मा
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बिहार – ले. जनरल (रि.) सैयद अता हसनैन
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तमिलनाडु – राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (अतिरिक्त प्रभार)
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तेलंगाना – शिव प्रताप शुक्ला
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हिमाचल प्रदेश – कविंदर गुप्ता
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नगालैंड – नंदकिशोर यादव
प्रशासनिक संतुलन की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपालों और उपराज्यपालों की यह नई नियुक्ति प्रशासनिक संतुलन, सुरक्षा और राजनीतिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।
इन बदलावों के बाद आने वाले समय में संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक कामकाज पर इसका असर देखने को मिल सकता है।











