Illegal mining : धनबाद। झारखंड के बाघमारा थाना क्षेत्र स्थित बीसीसीएल की बंद पड़ी सी-पैच खदान में मंगलवार रात एक बड़ा हादसा हो गया। अवैध कोयला खनन के दौरान खदान की चाल (स्लोपी दीवार) धंस गई, जिससे कम से कम 9 मजदूर मलबे में दब गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
रेस्क्यू में जुटी एनडीआरएफ और बीसीसीएल टीम
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की 33 सदस्यीय टीम कमान्डेंट संतोष पठानिया के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। टीम ने बीसीसीएल (Bharat Coking Coal Limited) की माइंस रेस्क्यू टीम के साथ संयुक्त राहत अभियान शुरू कर दिया है।
जमुनिया नदी का पानी बना बाधा
हादसा जमुनिया नदी के किनारे हुआ, जहां बारिश के चलते नदी का पानी खदान में घुस गया। इसके कारण पूरे क्षेत्र में दलदली हालात बन गए हैं, जिससे रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। बचाव कर्मी हर कोण से सुरंगों का मुआयना कर रहे हैं, ताकि दबे मजदूरों तक किसी तरह पहुंचा जा सके।
अवैध खनन बनी चुनौती
रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ये अवैध सुरंगें बिना किसी नक्शे या प्लानिंग के खोदी जाती हैं। बीसीसीएल की अधिकृत खदानों में जहां रेस्क्यू के लिए नक्शे उपलब्ध रहते हैं, वहीं इन अवैध खदानों में प्रवेश और निकास के रास्ते भी स्पष्ट नहीं होते। कई सुरंगें एक ही मुहाने से जाकर अलग-अलग दिशाओं में फैल जाती हैं, जिससे बचाव अभियान बेहद जोखिमपूर्ण हो गया है।
सांसद और विधायक मौके पर पहुंचे
हादसे की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय भी बुधवार को घटनास्थल पहुंचे। सांसद चौधरी ने बाघमारा थाना में अवैध खनन के खिलाफ लिखित शिकायत भी दर्ज कराई, जिसके बाद बचाव अभियान में और तेजी आई है।
अब तक की स्थिति
- 9 मजदूरों के दबे होने की आशंका
- एनडीआरएफ और बीसीसीएल की टीमें राहत कार्य में जुटीं
- दलदली ज़मीन और पानी बनी रुकावट
- अवैध खनन की बिना नक्शे वाली सुरंगें बनीं चुनौती
प्रशासन और सरकार पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन के नेटवर्क, प्रशासन की मौन सहमति, और स्थानीय नेताओं की निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार और बीसीसीएल इस हादसे से क्या सबक लेती है।











