Gwalior High Court : न्यूनतम वेतनमान को हटाने की कोशिश फेल, प्रवीण नामदेव को मिली राहत

VIKASH KHALKHO

Gwalior High Court : ग्वालियर। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग के उपयंत्री प्रवीण नामदेव के मामले में विभाग द्वारा न्यूनतम वेतनमान के पुराने आदेश को निरस्त करने के प्रयास को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब उपयंत्री को 1993 के आदेश के अनुसार श्रम न्यायालय के स्थायी वर्गीकरण आदेश से नियमित किया गया है, तो उस पर नए दिशा-निर्देश लागू नहीं किए जा सकते।

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उपयंत्री के वकील देवेश शर्मा ने बताया कि उनके मुवक्किल के स्थायी वर्गीकरण का आदेश सितंबर 1993 में श्रम न्यायालय द्वारा जारी किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को एफर्म किया और अप्रैल 2006 में राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके बाद विभाग ने जनवरी 2009 के अनुसार उपयंत्री को नियमित किया।

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Gwalior High Court :  हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने स्थायी वर्गीकृत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन लाभ देने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। ग्वालियर खंडपीठ ने माना कि उपयंत्री समस्त हित लाभ पाने के अधिकारी हैं और विभाग का यह प्रयास असंगत है।

देवेश शर्मा, एडवोकेट, हाईकोर्ट ग्वालियर:
“हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मेरे मुवक्किल को उनके सभी वैध हित लाभ प्राप्त होने चाहिए। यह न्यायपालिका द्वारा दी गई महत्वपूर्ण पुष्टि है।”

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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