Saturday, September 19, 2026
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Aakhar Literary Event Raipur: ‘आखर’ कार्यक्रम में बस्तर की गूंज, लेखिका रजनी शर्मा बस्तरिया से हुआ गहरा साहित्यिक संवाद

रायपुर। अभिकल्प फाउंडेशन और प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम ‘आखर’ में छत्तीसगढ़ी, हल्बी एवं हिंदी की लेखिका रजनी शर्मा बस्तरिया से साहित्यिक संवाद का आयोजन किया गया। सूत्रधार की भूमिका में गौरव गिरिजा शुक्ला ने बातचीत की। संवाद के दौरान लेखिका ने अपने साहित्यिक सफर, बस्तर से अपने जुड़ाव, लेखन की प्रेरणा तथा समकालीन साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार साझा किए।

रजनी जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा को लेकर बताया कि जगदलपुर में बीता उनका बचपन और साहित्यकार सुंदरलाल शर्मा के वंशज होने की पृष्ठभूमि ने उनके भीतर लेखन के संस्कार विकसित किए। महज 15 वर्ष की आयु में उनकी पहली कहानी, एक अखबार में प्रकाशित हुई। उन्होंने बताया कि बस्तर का परिवेश, वहां की प्रकृति, संस्कृति और उनके ननिहाल का उनके लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा। वर्ष 2013 में उनके पहले कविता संग्रह ‘अंजुरी’ का प्रकाशन हुआ।

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सोशल मीडिया के साहित्य पर प्रभाव और Gen Z की साहित्य में रुचि के विषय पर उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक प्रभावकारी माध्यम है, जिसका सकारात्मक और सार्थक उपयोग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने युवा पीढ़ी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए कहा कि Gen Z में अच्छी ग्रास्पिंग पावर और सकारात्मक सोच है। उनके सामने विकल्पों की अधिकता एक चुनौती अवश्य है, लेकिन यही विविधता नई संभावनाओं के द्वार भी खोलती है।

बाल साहित्य के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बाल साहित्य व्यक्ति को अपने बचपन को पुनः जीने का अवसर देता है। उन्होंने वर्तमान समय में बाल साहित्य की अपेक्षाकृत कम चर्चा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन्हें जन-जन तक पहुंचाने और इनके प्रचार-प्रसार के लिए अभी और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

सवाल-जवाब के सत्र में भाषा चयन पर उन्होंने बताया कि वह कहानी के पात्रों, उनके परिवेश और सामाजिक पृष्ठभूमि के अनुरूप भाषा का चयन करती हैं। अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर में हुए उनके लालन-पालन के कारण हल्बी उनके हृदय के बेहद करीब है। उन्होंने हल्बी की मधुरता और अभिव्यक्ति के सौंदर्य को अपनी लेखनी के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में मीर अली मीर, राहुल सिंह,  अशोक तिवारी, उमा तिवारी, जसवंत क्लॉडियस, देवेन्द्र शुक्ला सहित प्रबुद्ध साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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