Gharghoda Police Operation Prahar : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। जिले में पुलिस अधीक्षक की कमान संभालने के बाद से ही अपराधों पर नियंत्रण और पुलिस तंत्र में आई सक्रियता की चर्चा चारों ओर है। एसपी की कार्यकुशलता और उनके द्वारा पुलिस बल में पैदा किए गए जोश के चलते आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। यातायात व्यवस्था से लेकर अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों पर की जा रही कार्रवाई से अपराधियों में भय का माहौल है।
‘घर का भेदी, लंका ढाए’ वाली स्थिति एसपी के इन सार्थक प्रयासों के बावजूद, क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि जब तक पुलिस विभाग के भीतर ही बैठे ‘घर के भेदी’ ठिकाने नहीं लगाए जाएंगे, तब तक अपराधों की जड़ खत्म नहीं होगी। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और रिपोर्ट के अनुसार, थाना स्तर पर तैनात कुछ गिने-चुने पुलिस कर्मी अपनी स्वार्थ सिद्धि और अतिरिक्त कमाई के चक्कर में अपराधियों से सांठ-गांठ कर रहे हैं।
क्या है आरोप? रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि थाना स्तर पर तैनात कुछ पुलिस कर्मी संदिग्ध गतिविधियों से पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद उन पर नियंत्रण करने के बजाय अपराधियों के संरक्षणदाता की भूमिका निभा रहे हैं। ‘चेपटी और मुर्गे की टांग’ की संस्कृति को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानने वाले ऐसे भ्रष्ट पुलिस कर्मी ही जिले में बढ़ते अपराधों के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को चेतने की जरूरत नागरिकों का कहना है कि एसपी का ‘ऑपरेशन प्रहार’ तब तक पूरी तरह सफल नहीं माना जा सकता, जब तक कि ऐसे पुलिस कर्मियों की पहचान कर उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। यदि पुलिस के भीतर ही ‘अपराध मित्र’ बैठे रहेंगे, तो पुलिस की मेहनत और एसपी की मंशा दोनों पर पानी फिर जाएगा।
घरघोड़ा की जनता ने मांग की है कि जिस तरह से पुलिस अधीक्षक ने अपराधियों के खिलाफ सख्ती दिखाई है, उसी तरह से उन्हें अपने मातहतों की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी रखने की आवश्यकता है। वर्दी की साख बचाए रखने के लिए उन चंद पुलिस कर्मियों को चिह्नित करना अब समय की मांग है जो अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए समाज की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।











